प्रगतिशील लेखक संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन 20-22 अगस्त तक जबलपुर में, लेखकीय चुनौतियों पर होगा मंथन

Edited by Rajneesh Anand
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डाॅ मिथिलेश ने बताया कि इस तीन दिवसीय अधिवेशन में इस बात चर्चा होगी कि आज के समय में लेखकों के समक्ष चुनौतियां क्या हैं? क्या अभिव्यक्ति की आजादी सवालों के घेरे में है? साथ ही यह भी मंथन का विषय होगा कि इन चुनौतियों से कैसे निपटा जाए.

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अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन आगामी 20 अगस्त से 22 अगस्त तक मध्यप्रदेश के जबलपुर में आयोजित किया जा रहा है. इस राष्ट्रीय अधिवेशन की जानकारी देते हुए संघ के झारखंड इकाई के महासचिव डाॅ मिथिलेश ने बताया कि इस अधिवेशन में पूरे देश से लेखक जुटेंगे और विभिन्न लेखकीय सवालों पर मंथन होगा.

लेखकों के समक्ष क्या हैं चुनौतियां?

डाॅ मिथिलेश ने बताया कि इस तीन दिवसीय अधिवेशन में इस बात चर्चा होगी कि आज के समय में लेखकों के समक्ष चुनौतियां क्या हैं? क्या अभिव्यक्ति की आजादी सवालों के घेरे में है? साथ ही यह भी मंथन का विषय होगा कि इन चुनौतियों से कैसे निपटा जाए. कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में कई वक्ता अपने विचार रखेंगे और चर्चाएं होंगी. पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है-

पहला दिन – 20 अगस्त

रजिस्ट्रेशन की शुरुआत सुबह आठ बजे से हो जायेगाी. दस बजे झंडा फहराया जाएगा. उसके बाद विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत होगी, जिसमें पोस्टर प्रदर्शनी एवं पुस्तक प्रदर्शनी शामिल है. पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन नरेशन सक्सेना करेंगे. उसके बाद पहले सत्र की शुरुआत क्रांति गीत से होगी. फिर अतिथियों का स्वागत किया जाएगा. प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुन्नीलन का संदेश यहां पढ़ा जाएगा. इसके बाद एक पुस्तक का विमोचन होगा. एक लोक सांस्कृति जुलूस का आयोजन भी पहले दिन किया जायेगा. शाम के वक्त लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुटता की जरूरत विषय पर चर्चा होगी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जायेगा.

दूसरा दिन – 21 अगस्त

दूसरे दिन सत्र की शुरुआत पहले वैचारिक सत्र से होगी जिसका थीम है -अभिव्यक्ति के खतरों का सामना करना ही होगा, संरक्षण की चुनौतियां और संविधान का प्रचार. इस वैचारिक सत्र में पी लक्ष्मीनारायण (आंध्र प्रदेश), डॉ सैयदा हामिद (दिल्ली), रमाकांत श्रीवास्तव (मध्य प्रदेश),अरविंद श्रीवास्तव (मध्य प्रदेश),डॉ नवशरण कौर (दिल्ली), बिनय विश्वम (राज्यसभा सांसद, केरल), एल.हनुमंथैया (राज्यसभा सांसद, कर्नाटक), कुमार अंबुज (मध्य प्रदेश) एवं वीरेंद्र यादव शामिल होंगे. दूसरे दिन भी कई वैचारिक सत्र का आयोजन होगा. साथ ही पुस्तक विमोचन और कविता पाठ का भी आयोजन होगा.

तीसरा दिन – 22 अगस्त

तीसरे दिन के सत्र की शुरुआत भी वैचारिक सत्र के साथ होगी. उसके बाद प्रगतिशील लेखक संघ के राज्यों के प्रतिनिधियों के नाम तय किये जाएंगे. साथ ही नई कार्यकारिणी एवं पदाधिकारियों की घोषणा भी होगी. अंत में पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा.

1936 में हुई थी प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना

प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना 1936 में हुई थी. इस संघ की स्थापना का उद्देश्य लेखकों की चुनौतियों पर विचार करना और सामाजिक बुराइयों का अंत करना था. हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज बनना इस संघ का उद्देश्य है. संघ के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि साहित्य का उद्देश्य दबे-कुचले हुए वर्ग की मुक्ति का होना चाहिए’. 1935 में फोस्टर ने प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन नामक एक संस्था की नींव पेरिस में रखी थी, उसी की तर्ज पर भारत में 1936 में सज्जाद जहीर और मुल्क राज आनंद ने ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना की थी. यह साहित्य में प्रगतिवाद की कोशिश थी.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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