कोरोना काल में कारोबार हो गया ठप लेकिन नहीं हारी हिम्मत, आज बनायी प्रोफेशनल बेकर्स के रूप में पहचान

Published at :03 Sep 2023 12:52 PM (IST)
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कोरोना काल में कारोबार हो गया ठप लेकिन नहीं हारी हिम्मत, आज बनायी प्रोफेशनल बेकर्स के रूप में पहचान

कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के कारण 44 वर्षीया श्वेता जोशी का आर्ट एंड क्राफ्ट का कारोबार ठप पड़ गया, लेकिन घर की गाड़ी तो खींचनी ही थी, इसलिए उन्होंने खाना बनाने के शौक को अपने दूसरे कारोबार के विकल्प के रूप में देखा

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लॉकडाउन के दौरान कई लोगों का कारोबार जहां ठप पड़ गया, तो वहीं कई लोगों ने नये कारोबार की नींव भी रखी. आर्ट एंड क्राफ्ट का हुनर रखने वाली श्वेता नाग जोशी ने भी कोरोना के दौरान अपने कारोबार को खोया, मगर हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने फूड ट्रेंड को भांपा और उसमें लगातार अभ्यास से कुशलता हासिल की. आज उनकी पहचान प्रोफेशनल बेकर्स के रूप में है.

कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के कारण 44 वर्षीया श्वेता जोशी का आर्ट एंड क्राफ्ट का कारोबार ठप पड़ गया, लेकिन घर की गाड़ी तो खींचनी ही थी, इसलिए उन्होंने खाना बनाने के शौक को अपने दूसरे कारोबार के विकल्प के रूप में देखा और केक बनाने का काम शुरू किया. उनके बनाये केक न केवल शादी, जन्मदिन, वर्षगांठ समारोह में, बल्कि उन जोड़ों के खुशी में भी चार-चांद लगाते हैं, जो तलाक या ब्रेकअप का जश्न मनाना चाहते हैं.

नोएडा की रहने वाली श्वेता नाग जोशी पिछले तीन वर्षों से केक बना रही हैं, जिसे लोग खासा पसंद करते हैं. वे बताती हैं, “मैं हमेशा से एक केक बेकर नहीं थी. बस खाना बनाना पसंद था. इससे पहले मैं ‘आर्टवेंचर एडुक्राफ्ट’ चलाती थी, जहां विभिन्न स्कूलों के साथ काम किया है. वहां बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट सिखाने का काम किया करती थी. यह कुछ ऐसा था, जिसे करना मुझे बहुत पसंद था, लेकिन दुर्भाग्य से कोरोना महामारी ने मेरे कारोबार की गाड़ी पर अचानक ब्रेक लगा दिया. मैं बच्चों को स्क्रीन से दूर करना चाहता थी, लेकिन महामारी के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था.’

यूट्यूब से मिली ट्रेनिंग

श्वेता ने यूट्यूब पर फोकस किया और वहां से सीखने की कोशिश की, क्योंकि उन्हें लगा कि यहां से आसानी से वे आमदनी कर सकती हैं. हालांकि, फिर महसूस हुआ कि यूट्यूब के जरिये तुरंत कमाई शुरू नहीं हो सकती है, इसलिए उन्होंने अपना ट्रैक बदला और यूट्यूब की मदद से ही केक बेकिंग, ब्रेड आदि बनाने की कोशिश करने लगीं. इसे देखकर इसी दौरान उनके एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी कि क्यों न वे केक बेकिंग का ही छोटा-सा कारोबार शुरू करें. फिर श्वेता ने अपनी पाक कला को निखारने का फैसला किया. मई, 2020 में लॉकडाउन के दो महीने बाद उन्होंने अपने कारोबार की शुरुआत की और इसका नाम रखा ‘क्वारंटाइन बेकर्स’.

व्हाट्सएप से हुई शुरुआत

अपने काम को प्रोमोट करने के लिए श्वेता ने व्हाट्सएप का इस्तेमाल शुरू किया और अपनी सोसायटी के लोगों के साथ एक ग्रुप बनाया, जहां वे अपनी बनायी ब्रेड, केक आदि की तस्वीरें शेयर करने लगीं. वे बताती हैं, “शुरुआत में यह मात्र एक प्रयोग था, पर मेरे शुरुआती ग्राहक मेरे सबसे बड़े चीयरलीडर्स और मार्केटर्स बन गये. उन्होंने मेरे उत्पादों का प्रचार करना शुरू किया और मुझे ऑर्डर मिलने शुरू हो गये. चूंकि, मैंने कोई वेबसाइट या कोई खास जगह ऑर्डर लेने के लिए नहीं बनायी थी, इसलिए सारे ऑर्डर मौखिक तौर पर ही मिलते थे.

फिर उन्होंने Quarantine.bakers नाम से इंस्टाग्राम प्रोफाइल बनाया, जहां वे अपने प्रोडक्ट की तस्वीरें शेयर करती हैं. आज श्वेता दिल्ली, एनसीआर, देहरादून, बेंगलुरु, मुंबई और चंडीगढ़ में भी ग्राहकों को सेवाएं दे रही हैं. उनके कस्टम केक की कीमत 2,000 रुपये प्रति किग्रा से शुरू होती है.

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