प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार से पूछे 5 सवाल, नोटबंदी सफल थी तो भ्रष्टाचार खत्म क्यों नहीं हुआ?

नोटबंदी के 5 साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए मोदी सरकार से 5 सवाल पूछे हैं.
नई दिल्ली : आज आठ नवंबर 2021 है और नोटबंदी के 5 साल पूरे हो गए हैं. आज ही के दिन साल 2016 में भारत के बाजारों से 1000 और 500 रुपये के पुराने नोटों का चलन बंद कर दिया गया था. नोटबंदी के 5 साल पूरे होने पर कांग्रेस की महासचिव और उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने नोटबंदी के 5 साल पूरे होने के मौके पर मोदी सरकार से 5 सवाल पूछे हैं. सोमवार की सुबह ट्वीट करके उन्होंने मोदी सरकार से सवाल पूछा है कि नोटबंदी सफल थी, तो भ्रष्टाचार खत्म क्यों नहीं हुआ?
नोटबंदी के 5 साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए मोदी सरकार से 5 सवाल पूछे हैं. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, ‘अगर नोटबंदी सफल थी तो भ्रष्टाचार खत्म क्यों नहीं हुआ? कालाधन वापस क्यों नहीं आया? अर्थव्यवस्था कैशलेस क्यों नहीं हुई? आतंकवाद पर चोट क्यों नहीं हुई? महंगाई पर अंकुश क्यों नहीं लगा?’
बता दें कि 8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में नोटबंदी का ऐलान किया था. उनके ऐलान के 4 घंटे बाद आधी रात से ही 1000 रुपये और 500 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था. मोदी सरकार के इस फैसले के बाद कई महीनों तक देश में अफरा-तफरी मची रही. हालांकि, बाद में रिजर्व बैंक की ओर से 2000 रुपये और 500 रुपये के नए नोटों को बाजार में उतारा गया.
नोटबंदी के पीछे सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि इससे कालाधन वापस आएगा और भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा. इसके साथ ही, देश में नकदी का चलन समाप्त होकर कैशलेस का चलन बढ़ेगा. रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 4 नवंबर 2016 के पहले यानी नोटबंदी का ऐलान होने के चार दिन पहले तक देश में चलन में रहने वाले कुल नोटों का मूल्य 17.74 लाख करोड़ रुपये था, जो 29 अक्टूबर 2021 तक बढ़कर 29.17 लाख करोड़ हो गया है.
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इसके साथ ही, वर्ष 2018 की अपनी एक रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने बताया था कि नोटबंदी के बाद करीब 99 फीसदी नोट चलन में वापस आ गए. इसके साथ ही, रीयल एस्टेट सेक्टर में नकदी लेन-देन में किसी प्रकार की कमी नहीं आई. दिसंबर 2018 और जनवरी 2019 में रिजर्व बैंक की ओर से कराए गए पायलट सर्वे में यह बात भी सामने आई थी कि नियमित खर्चों के लिए लोग लेन-देन के लिए नकदी का ही इस्तेमाल करते हैं.
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