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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया 'वैभव' शिखर सम्मेलन का उद्घाटन, 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों से मांगा समर्थन

Updated at : 02 Oct 2020 9:02 PM (IST)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया 'वैभव' शिखर सम्मेलन का उद्घाटन, 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों से मांगा समर्थन

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (वैभव) शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया. यह सम्मेलन दो अक्तूबर से 31 अक्तूबर तक आयोजित किया जायेगा. यह एक ऐसा सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य भारतीय शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को एक साथ लाना है.

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (वैभव) शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया. यह सम्मेलन दो अक्तूबर से 31 अक्तूबर तक आयोजित किया जायेगा. यह एक ऐसा सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य भारतीय शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को एक साथ लाना है.

वैभव शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ”मैं उन वैज्ञानिकों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने आज अपने सुझाव और विचार पेश किये. आपमें से अधिकतर लोगों ने अपने विदेशी समकक्षों के साथ भारतीय शैक्षणिक और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के बीच अधिक सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला है.

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उन्होंने कहा कि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाये हैं. विज्ञान सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों की दिशा में हमारे प्रयास के मूल में है. हमने सिस्टम में जड़ता को तोड़ा है. उन्होंने कहा कि हम किसानों की मदद के लिए शीर्ष श्रेणी के वैज्ञानिक अनुसंधान चाहते हैं. हमारे कृषि अनुसंधान वैज्ञानिकों ने दालों के हमारे उत्पादन को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की है. आज हम दाल का बहुत ही कम हिस्सा आयात करते हैं. हमारा खाद्यान्न उत्पादन नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साल 2014 में टीकाकरण कार्यक्रम के तहत चार नये टीके लगाये गये. इसमें स्वदेशी रूप से विकसित रोटावायरस वैक्सीन शामिल था. हम देसी वैक्सीन उत्पादन को प्रोत्साहित करते हैं. यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि आज के अधिक से अधिक युवा विज्ञान में रूचि विकसित करें. इसके लिए विज्ञान के इतिहास और इतिहास के विज्ञान से हमें अच्छी तरह से परिचित होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पिछली शताब्दी में विज्ञान की मदद से प्रमुख ऐतिहासिक सवालों को हल किया गया है. वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग अब तिथियों के निर्धारण और अनुसंधान में मदद में किया जाता है. हमें भारतीय विज्ञान के समृद्ध इतिहास को भी बढ़ाना होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के एक आत्मनिर्भर भारत बनने में वैश्विक कल्याण भी जरूरी है. इस सपने को साकार करने के लिए मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूं और आपका समर्थन चाहता हूं. हाल ही में भारत ने अग्रणी अंतरिक्ष सुधारों की शुरुआत की है. ये सुधार उद्योग और शिक्षा दोनों के लिए भी अवसर प्रदान करते हैं.

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