दिल्ली सेवा विधेयक समेत सात नये कानूनों को राष्ट्रपति की मंजूरी, पढ़ें रिपोर्ट

दिल्ली सेवा विधेयक में राष्ट्रीय राजधानी में ग्रुप-ए अधिकारियों की तैनाती एवं तबादले के लिए एक प्राधिकरण के गठन और ऐसी नियुक्तियों पर केंद्र सरकार को प्रधानता देने संबंधी प्रावधान हैं. संबंधित विधेयक तीन अगस्त को लोकसभा से और सात अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ था.
संसद द्वारा इस सप्ताह पारित दिल्ली में सेवाओं के मामले के नियंत्रण से संबंधित विधेयक सहित सात नए कानून राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद शनिवार को लागू हो गए. इधर दिल्ली सेवा बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद बीजेपी ने खुशी जाहिर करते हुए इसे दिल्ली की जनता के हित में बताया.
इन विधेयक का राष्ट्रपति की मिली मंजूरी
जो कानून लागू हो गए हैं, उनमें जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023; राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023; जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 शामिल हैं. इनमें भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2023; राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2023 और अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023 भी शामिल हैं. इन अधिनियमों से संबंधित गजट अधिसूचना जारी कर दी गयी है.
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सात नये कानून प्रभावी
पिछले सप्ताह भी, संसद द्वारा पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी दिए जाने के बाद सात नए कानून प्रभावी हो गए.
ये कानून थे- खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023; सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023, वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023. इसके अलावा, इनमें संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2023; संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) अधिनियम, 2023; बहु राज्य सहकारी सोसायटी संशोधन अधिनियम 2023 और जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 भी शामिल हैं.
क्या है दिल्ली सेवा विधेयक
दिल्ली सेवा विधेयक में राष्ट्रीय राजधानी में ग्रुप-ए अधिकारियों की तैनाती एवं तबादले के लिए एक प्राधिकरण के गठन और ऐसी नियुक्तियों पर केंद्र सरकार को प्रधानता देने संबंधी प्रावधान हैं. विधि एवं न्याय मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम 2023 को अपनी स्वीकृति दे दी है. एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही यह विधेयक कानून में तब्दील हो गया, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश, 2023 का स्थान लेगा.
मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बदला, जानें पूरा मामला
संबंधित विधेयक तीन अगस्त को लोकसभा से और सात अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ था. यह अधिनियम दिल्ली के उपराज्यपाल को राष्ट्रीय राजधानी के अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती को लेकर अंतिम अधिकार देता है और सेवाओं पर केंद्र सरकार के नियंत्रण को मजबूत करता है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को फैसला सुनाया था कि राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि से संबंधित मामलों पर केंद्र सरकार का, जबकि सेवाओं पर दिल्ली की निर्वाचित सरकार का नियंत्रण होगा. इसके बाद केंद्र सरकार 19 मई को दिल्ली में ग्रुप-ए के अधिकारियों की तैनाती और तबादले को लेकर एक प्राधिकरण बनाने के वास्ते अध्यादेश लेकर आई थी. यह अधिनियम अखिल भारतीय सेवाओं और दानिक्स से संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार को तरजीह देता है.
जीएनसीटीडी (संशोधन) अधिनियम दिल्लीवासियों को राहत प्रदान करेगा: भाजपा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई ने शनिवार को कहा कि जीएनसीटीडी (संशोधन) अधिनियम की राजपत्रित अधिसूचना जारी होने से शहर में उचित प्रशासन व विकास की उम्मीद कर रहे करोड़ों दिल्लीवासियों को राहत मिली है. दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष ने वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, जीएनसीटीडी (संशोधन) अधिनियम की राजपत्रित अधिसूचना दिल्ली के करोड़ों नागरिकों के लिए राहत लेकर आई है, जो अब उम्मीद कर रहे हैं कि शहर में उचित प्रशासन और विकास होगा. भाजपा सचिव बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह अधिनियम दिल्ली में नौकरशाही के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करेगा और विकास की उम्मीद कर रहे लोगों को न्याय प्रदान करेगा.
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