हाथरस घटना में पुलिस की कार्रवाई से छवि खराब हुई, मीडिया और नेताओं को परिवार से मिलने दिया जाये : उमा भारती

Author : Agency Published by : Prabhat Khabar Updated At : 02 Oct 2020 10:07 PM

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नयी दिल्ली : भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने शुक्रवार को कहा कि हाथरस की घटना में उत्तर प्रदेश पुलिस की 'संदिग्ध' कार्रवाई के कारण भाजपा, राज्य सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने योगी से अनुरोध किया कि मीडियाकर्मियों तथा नेताओं को पीड़िता के परिवार से मिलने दिया जाये.

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नयी दिल्ली : भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने शुक्रवार को कहा कि हाथरस की घटना में उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘संदिग्ध’ कार्रवाई के कारण भाजपा, राज्य सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने योगी से अनुरोध किया कि मीडियाकर्मियों तथा नेताओं को पीड़िता के परिवार से मिलने दिया जाये.

उमा भारती ने कहा कि अगर उनका स्वास्थ्य ठीक होता तो वह खुद भी पीड़िता के परिवार से मिलने हाथरस जातीं. मालूम हो कि कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद उमा भारती को ऋषिकेश के एम्स में भर्ती कराया गया है. उन्होंने कहा कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह निश्चित ही परिवार से मिलने जायेंगी.

उमा भारती ने ट्वीट कर कहा है कि, ”उत्तर प्रदेश पुलिस की संदिग्ध कार्रवाई के कारण भाजपा, उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकसान पहुंचा है.” भारती ने कहा कि वह हाथरस प्रकरण पर करीब से नजर रखे हुए हैं. साथ ही उन्होंने योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया कि मीडियाकर्मियों एवं राजनीतिक दलों के लोगों को पीड़ित परिवार से मिलने दिया जाये.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को साफ-सुथरी छविवाला शासक बताते हुए भारती ने कहा, ”मैं आपसे वरिष्ठ एवं आपकी बड़ी बहन हूं.” हालांकि, उन्होंने यह भी जताया कि पुलिस द्वारा गांव और पीड़ित परिवार की घेराबंदी करने से वह बोलने के लिए मजबूर हुई हैं.

उन्होंने ट्वीट किया, ”मैंने हाथरस की घटना के बारे में देखा. पहले तो मुझे लगा कि मैं ना बोलूं. क्योंकि, आप इस संबंध में ठीक ही कार्रवाई कर रहे होंगे. किंतु, जिस प्रकार से पुलिस ने गांव की एवं पीड़ित परिवार की घेराबंदी की है, उसके कितने भी तर्क हों, लेकिन इससे विभिन्न आशंकायें जन्मती हैं.”

उमा भारती ने ट्वीट में लिखा, ”मेरी जानकारी में ऐसा कोई नियम नहीं है कि एसआइटी जांच में परिवार को किसी से मिलने की अनुमति नहीं होती. इससे तो एसआइटी जांच ही संदेह के दायरे में आ जायेगी.” हाथरस के एक गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने 19 वर्षीया दलित लड़की का कथित तौर पर बलात्कार किया था. बाद में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गयी.

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