पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र से कहा- त्योहार मनाएं लेकिन सावधानियों के साथ, कोरोना अभी गया नहीं है
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Oct 2021 10:35 AM
पीएम नरेंद्र मोदी: गुरुवार 21 अक्टूबर 2021 को 100 करोड़ से अधिक कोरोना डोज देकर भारत ने टीकाकरण अभियान में एक नया इतिहास रच दिया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के चिकित्सकों, चिकित्साकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और दवा निर्माता को बधाई और धन्यवाद ज्ञापित किया
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की सुबह 10 बजे राष्ट्र को संबोधित किया. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे देश ने एक तरफ कर्तव्य का पालन किया तो दूसरी तरफ उसे बड़ी सफलता मिली. कल 21अक्टूबर को भारत ने एक बिलियन कठिन लेकिन असाधारण लक्ष्य को हासिल किया है. इस उपलब्धि के पीछे देश की 130 करोड़ की आबादी की शक्ति लगी है. यह सफलता देशवासियों की सफलता है. मैं सभी देशवासियों को बधाई देता हूं.
उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तेजी से 100 करोड़ का आंकड़ा पार किया है उसकी सराहना हो रही है, लेकिन हम इस दौरान अक्सर भूल जाते हैं कि इसकी शुरुआत हमने कहां से की है. वैक्सीनेशन को खोजना और रिसर्च करना बड़ी बात है. 100 साल की सबसे बड़ी महामारी जब सामने आई तो भारत को लेकर सवाल खड़े किए जाने लगे कि भारत कहां से वैक्सीन लाएगा. भारत के पास इतनी बड़ी आबादी के लिए वैक्सीन कहां से आएगा. भारत के पास पैसा कहां से आएगा, लेकिन 100 करोड़ डोज इन सभी सवालों का जवाब दे रहा है.
उन्होंने कहा कि इस 100 करोड़ डोज से दुनिया भारत की इस ताकत को देख रहा है. भारत एक फार्मा हब के रूप में विकसित हो रहा है. भारत सबका साथ, सबका विश्वास और सबका विकास का जीता जागता उदाहरण है. दुनिया में कहा जा रहा था कि इस महामारी में भारत के लिए लड़ना मुश्किल होगा. कहा यह जा रहा था कि भारत में इतना संयम कैसे बरता जाएगा. लेकिन भारत में 130 करोड़ आबादी को मुफ्त में वैक्सीन दी गई.
उन्होंने कहा कि बीमारी अगर भेदभाव नहीं करती तो वैक्सीन में भेदभाव क्यों. वैक्सीन में वीआईपी कल्चर को दूर किया गया. कहा यह भी जा रहा था कि यहां वैक्सीन लगाने के लिए कोई आएगा ही नहीं, लेकिन भारत के लोगों ने 100 करोड़ डोज लेकर ऐसे लोगों को निरुत्तर कर दिया है. ऐसे में सबका प्रयास एकजुट हो जाता है तो परिणाम अद्भुत होते हैं.
वैक्सीन बनने से लेकर लगाने तक साइंस और साइंटिफिक अप्रोच रहा है. वैक्सीनेशन एक चुनौती थी. यह भगीरथ प्रयास से कम नहीं था. देश के सुदूर क्षेत्रों में इसे पहुंचाना कठिन था. किस देश में कैसे कितनी वैक्सीन पहुंचानी चाहिए, इसके लिए भी वैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल किया गया.
पीएम मोदी ने कहा कि आज कई लोग भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम की तुलना दुनिया के दूसरे देशों से कर रहे हैं. भारत ने जिस तेजी से 100 करोड़ का, 1 बिलियन का आंकड़ा पार किया, उसकी सराहना भी हो रही है. लेकिन, इस विश्लेषण में एक बात अक्सर छूट जाती है कि हमने ये शुरुआत कहाँ से की है. भारत के लोगों को वैक्सीन मिलेगी भी या नहीं? क्या भारत इतने लोगों को टीका लगा पाएगा कि महामारी को फैलने से रोक सके? भांति-भांति के सवाल थे, लेकिन आज ये 100 करोड़ वैक्सीन डोज, हर सवाल का जवाब दे रही है. जब 100 साल की सबसे बड़ी महामारी आई, तो भारत पर सवाल उठने लगे. क्या भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ पाएगा? भारत दूसरे देशों से इतनी वैक्सीन खरीदने का पैसा कहां से लाएगा? भारत को वैक्सीन कब मिलेगी?
पीएम मोदी ने कहा कि हमने महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई जन भागीदारी को अपनी पहली ताकत बनाया. देश ने अपनी एकजुटता को ऊर्जा देने के लिए ताली, थाली बजाई, दीए जलाए तब कुछ लोगों ने कहा था कि क्या इससे बीमारी भाग जाएगी? लेकिन हम सभी को उसमें देश की एकता दिखी, सामूहिक शक्ति का जागरण दिखा. आज भारतीय कंपनियों को न केवल रिकॉर्ड निवेश मिल रहा है, बल्कि रोजगार सृजन भी हो रहा है. स्टार्ट-अप में रिकॉर्ड निवेश के साथ-साथ रिकॉर्ड स्टार्टअप यूनिकॉर्न भी विकसित किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे देश ने कॉविन प्लेटफॉर्म की जो व्यवस्था बनाई है, वो भी विश्व में आकर्षण का केंद्र है. भारत में बने कॉविन प्लेटफॉर्म ने न केवल आम लोगों को सहुलियत दी, बल्कि मेडिकल स्टाफ के काम को भी आसान बनाया है. भारत और विदेशों के विशेषज्ञ भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर काफी सकारात्मक हैं. आज भारतीय कंपनियों में न केवल रिकॉर्ड निवेश आ रहा है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं.
मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि आने वाले त्योहारों को अत्यंत सावधानी के साथ मनाएं. मैं उन सभी लोगों से अपील करता हूं, जिन्होंने अभी तक कोविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक नहीं ली है, उन्हें टीका लगवाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. टीकाकरण कराने वालों को चाहिए कि वे दूसरों को प्रोत्साहित करें.
इसके पहले शुक्रवार की सुबह प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी गई थी. हालांकि, पीएमओ की ओर से इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि वे किस मसले पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे, लेकिन मीडिया की खबरों में इस बात को लेकर कयास लगाया जा रहा है कि वे राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में 2 से 18 साल के आयुवर्ग के बच्चों को वैक्सीन का डोज देने को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं.
बता दें कि गुरुवार 21 अक्टूबर 2021 को 100 करोड़ से अधिक कोरोना डोज देकर भारत ने टीकाकरण अभियान में एक नया इतिहास रच दिया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के चिकित्सकों, चिकित्साकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और दवा निर्माता कंपनियों को बधाई और धन्यवाद ज्ञापित किया.
PM @narendramodi will address the nation at 10 AM today.
— PMO India (@PMOIndia) October 22, 2021
शुक्रवार की सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर मीडिया में इस बात को लेकर कयास लगाया जा रहा है कि दिवाली का त्योहार आने वाला है और देश की करीब 25 फीसदी आबादी ने अभी तक कोरोना की एक भी खुराक नहीं लगवाई है. ऐसे में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील कर सकते हैं, जिन लोगों ने अभी तक इसकी एक भी खुराक नहीं लगवाई है.
इसके साथ ही, अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि देश में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में गिरावट तो आई है, लेकिन तीसरी लहर का खतरा अब भी बना हुआ है. वैज्ञानिकों ने पहले ही इस बात की आशंका जाहिर कर दी है कि तीसरी लहर के दौरान बच्चे सबसे अधिक संक्रमित हो सकते हैं. हालांकि, 2 से 18 साल आयुवर्ग के बच्चों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए देश की कई दवा निर्माता कंपनियों ने वैक्सीन तैयार कर ली है और उसमें से एकाध को इमरजेंसी यूज की मंजूरी भी मिल गई है. ऐसे में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों के टीकाकरण को लेकर भी कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं.
गौरतलब है कि कोरोना टीकाकरण के मामले में भारत से आगे केवल चीन है. भारत ने अपने यहां करीब 100 करोड़ से अधिक डोज लगा दिए हैं, जबकि चीन में 222 करोड़ से अधिक कोरोना डोज लगाई जा चुकी है. चीन और भारत के बाद अमेरिका तीसरे नंबर पर आता है और उसके बाद जापान, ब्राजील और जर्मनी आते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में चौकाने वाले फैसले जनता को बताने के लिए जाने जाते हैं. 2016 में 8 नवंबर को उन्होंने नोटबंदी की घोषणा राष्ट्र के नाम संबोधन में ही की थी. इसके बाद 2020 में उन्होंने देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान भी ऐसे ही एक संबोधन में किया था.
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