MP Election 2023: 'पेशाब कांड' क्या बढ़ाएगी बीजेपी की मुश्किल, जानें सीधी विधानसभा सीट का समीकरण

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 01 Oct 2023 6:43 AM

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MP Election 2023 : साल में 2018 में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए थे जिसके बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. जानें सीधी विधानसभा सीट का हाल और बीजेपी की परेशानी...बीजेपी की दूसरी लिस्ट के बाद कयासों का बाजार गर्म

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MP Election 2023 : मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले एक सीट की चर्चा लोग जोरों से कर रहे हैं. जी हां…बीजेपी की दूसरी लिस्ट के बाद ये चर्चा और तेज हो चली है. दरअसल, ‘पेशाब कांड’ के बाद सुर्खियों में आई विंध्य क्षेत्र की सीधी विधानसभा सीट में बीजेपी ने उम्मीदवार को लेकर ऐसा फैसला लिया जिसने सबको चौंका दिया. बीजेपी ने यहां से सांसद रीति पाठक को चुनावी मैदान में उतारा और वर्तमान बीजेपी विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट काट दिया. बताया जा रहा है कि केदारनाथ शुक्ला के टिकट कटने की सबसे बड़ी वजह ‘पेशाब कांड’ ही है. क्योंकि पेशाब कांड के आरोपी प्रवेश शुक्ला बीजेपी से जुड़ा हुआ था. खबरें ऐसी भी आई थी कि आरोपी विधायक केदार नाथ का करीबी था. इस घटना के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर जोरदार हमला किया. यही नहीं बीजेपी पर मध्य प्रदेश में आदिवासियों के अपमान आरोप लगा. इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पीड़ित के चरण धोकर डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया. आइए अब जानते हैं सीधी विधानसभा सीट का हाल…

सीधी विधानसभा सीट की 2018 में क्या थी स्थिति

साल में 2018 में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए थे जिसके बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. हालांकि मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत की वजह से गिर गई थी. इसके बाद फिर बीजेपी सत्ता में लौटी थी. सीधी विधानसभा सीट की बात करें तो यहां 2018 के चुनाव में केदारनाथ शुक्ला ने जीत दर्ज की थी जो बीजेपी के उम्मीदवार थे. शुक्ला ने कांग्रेस के उम्मीदवार कमलेश्वर प्रसाद 19,986 वोटों से पराजित किया था. इस सीट पर 45 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. सीधी विधानसभा सीट सीधी लोकसभा के अंतर्गत आती है जहां की सांसद रीति पाठक हैं. अब बीजेपी ने उन्हें विधानसभा के मैदान में उतारा है. रीति पाठक को टिकट मिलने के बाद चुनाव यहां रोचक हो चुका है. रीति पाठक की बात करें तो उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अजय सिंह को हराया था.

विधानसभा चुनाव पहली बार लड़ेगी रीति पाठक

रीति पाठक की बात करें तो उन्होंने सीधी से लगातार दो लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की है, उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का झंडा यहां से बुलंद किया. हालांकि वह विधानसभा चुनाव पहली बार लड़ती नजर आने वालीं हैं. ऐसे में इस बार भी उन पर सबकी नजरें टिक गई है. उल्लेखनीय है कि सीधी से स्थानीय विधायक केदारनाथ शुक्ला बीजेपी के कद्दावर नेता माने जाते हैं. वह 4 बार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके हैं. उनका टिकट कटने के बाद आगे क्या होगा ये देखने वाली बात होगी.

सीधी विधानसभा का जातिगत समीकरण जानें

विधानसभा चुनाव 2018 के पहले आई वोटर लिस्ट की बात करें तो, सीधी विधानसभा में 2.24 लाख से ज्यादा मतदाता हैं. इनमें 1,06 लाख से ज्यादा महिला मतदाता हैं जबकि 1.17 लाख से ज्यादा पुरुष मतदाता हैं. क्षेत्र में सबसे ज्यादा गोंड मतदाता हैं. इसके बाद ब्राह्मण, क्षत्रिय और साहू ऐसे मतदाता हैं जो निर्णायक स्थिति में नजर आते हैं. शहरी इलाके में व्यापारी वर्ग ही हार-जीत तय करने का काम करता है.

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सीधी विधानसभा सीट का क्या है इतिहास

-2018- बीजेपी के केदारनाथ शुक्ला

-2013- बीजेपी के केदारनाथ शुक्ला

-2008- बीजेपी के केदारनाथ शुक्ला

-2003- कांग्रेस के इंद्रजीत कुमार

-1998- कांग्रेस के इंद्रजीत कुमार

-1993- कांग्रेस के पतिराज सिंह

-1990- बीजेपी के अमर सिंह

-1985- बीजेपी के अन्नथ सिंह

-1980- कांग्रेस के पतिराज सिंह

-1977- जेएनपी में जगन्नाथ सिंह

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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