Eye Drop: भारतीय कंपनी के आई ड्रॉप से US में अंधे हो रहे लोग? CDSCO ने मैन्युफैक्चरिंग पर लगाई रोक

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 04 Feb 2023 7:27 PM

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कंपनी द्वारा आई ड्रॉप वापस लेने के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और राज्य औषधि नियंत्रक की टीम ने तमिलनाडु में चेन्नई से 40 किलोमीटर दूर कांचीपुरम में संयंत्र का दौरा किया. टीम ने आई ड्रॉप-आर्टिफिशियल टियर्स के नमूने भी एकत्र किए, जिन्हें निर्यात किया गया था.

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अमेरिका में आई ड्रॉप से आंखों की रोशनी जाने के मामले में भारतीय औषधि नियामक निकायों (Indian drug regulatory bodies) ने मैन्युफैक्चरिंग पर रोक लगा दी है. यह फैसला तमिलनाडु के ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर के संयंत्र की जांच के एक दिन बाद लिया गया. जांच पूरी होने तक कंपनी कोई भी मैन्युफैक्चरिंग नहीं कर पायेगी.

टीम ने किया कंपनी का दौरा, आई ड्रॉप-आर्टिफिशियल टियर्स के नमूने भी एकत्र किए

कंपनी द्वारा आई ड्रॉप वापस लेने के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और राज्य औषधि नियंत्रक की टीम ने तमिलनाडु में चेन्नई से 40 किलोमीटर दूर कांचीपुरम में संयंत्र का दौरा किया. टीम ने आई ड्रॉप-आर्टिफिशियल टियर्स के नमूने भी एकत्र किए, जिन्हें निर्यात किया गया था. भारत में यह आई ड्रॉप नहीं बेचा जाता है.

कंपनी ने अमेरिका को आई ड्रॉप के 24 बैच की दो खेप किये थे निर्यात

जांच के दौरान, यह पाया गया कि, कंपनी ने अमेरिका को आई ड्रॉप के 24 बैच की दो खेप का निर्यात किया, जिनका निर्माण 2021 और 2022 में हुआ था. रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान उक्त बैच का कोई स्टॉक नहीं मिला.

शिकायत के बार वापस मंगायी गयी दवा की खेप

यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) ने पूर्व में एक बयान में कहा था कि चेन्नई स्थित कंपनी संभावित खामी के कारण एजरीकेयर, एलएलसी और डेलसम फार्मा द्वारा वितरित सभी आई ड्रॉप को वापस ले रही है.

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55 मामले आये सामने

गौरतलब है कि भारतीय कंपनी के आई ड्रॉप से आंखों की रोशनी जाने के बाद कुल 55 मामले सामने आए. यूएसएफडीए ने कहा कि खामी वाले आई ड्रॉप के इस्तेमाल से आंखों में संक्रमण का खतरा हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अंधापन हो सकता है.

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लेखक के बारे में

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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