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चीन के साथ नजदीकियों से पाकिस्तान को हो सकता है नुकसान, इमरान को सता रहा इस बात का डर

Updated at : 04 Jul 2020 5:01 PM (IST)
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चीन के साथ नजदीकियों से पाकिस्तान को हो सकता है नुकसान, इमरान को सता रहा इस बात का डर

नयी दिल्ली : चीन के दोस्ताना संबंध पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है. अपने ही देश में विपक्ष लगातार इमरान खान पर हमलावर हो रहा है. एक ओर जहां विरोधी उन्हें नकारा प्रधानमंत्री कह रहे हैं. वहीं, उनकी कूटनीतिक समझ की खूब आलोचना हो रही है. चीन के महत्वाकांक्षी परियोजना 'चीन-पाक आर्थिक गलियारा' (CPEC) पर भारत ने कड़ी आपत्ति जतायी थी. विश्व के बड़े देशों भी पाकिस्तान पर आतंकवाद के पोषक होने का आरोप लगाते रहते हैं.

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नयी दिल्ली : चीन के दोस्ताना संबंध पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है. अपने ही देश में विपक्ष लगातार इमरान खान पर हमलावर हो रहा है. एक ओर जहां विरोधी उन्हें नकारा प्रधानमंत्री कह रहे हैं. वहीं, उनकी कूटनीतिक समझ की खूब आलोचना हो रही है. चीन के महत्वाकांक्षी परियोजना ‘चीन-पाक आर्थिक गलियारा’ (CPEC) पर भारत ने कड़ी आपत्ति जतायी थी. विश्व के बड़े देशों भी पाकिस्तान पर आतंकवाद के पोषक होने का आरोप लगाते रहते हैं.

चीन के हर काम में हां में हां मिलाने वाला पाकिस्तान अभी काफी घबराया हुआ है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक से लद्दाख दौरे के बाद तो पाकिस्तान की हालत खराब है. गलवान घाटी हिंसक झड़प के बाद लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर है. पाकिस्तान इससे भी डरा हुआ है. आर्थिक मामले में पाकिस्तान कई बड़े देशों पर आज भी निर्भर है. सीपीईसी पर बलूच और गिलगित बालटिस्तान के आम लोगों में काफी आक्रोश है.

पाकिस्तान के इस प्रदेश के लोगों का आरोप है कि सीपीईसी के बहाने चीन पाकिस्तान के इन इलाकों में प्राकृतिक संसाधनों का बेरहमी से दोहन कर रहा है. इतना ही नहीं स्थानीय लोगों को बेघर किया जा रहा है उनके लिए परेशानियां पैदा की जा रही है. पाकिस्तान के साथ समझौते में चीन ने इस काम में स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन किया इसके उलट. चीनी लोग ही इस परियोजना में काम कर रहे हैं और स्थानीय लोगों को केवल नुकसान उठाना पड़ रहा है.

पाकिस्तान के बहकावे में ही चीन हमेशा से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पर भारत का विरोध करता आया है. पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देकर चीन उसे अपने चंगुल में फंसाये रखना चाहता है. लद्दाख में हिंसक झड़प की घटना के बाद से पाकिस्तान के ऊपर इस बात का भारी दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह चीन को लेकर या तो अपनी नीति की समीक्षा करे अन्यथा वैश्विक बहिष्कार और आलोचना झेलने के लिए तैयार हो जाए.

यहां बता दें कि कोरोनावायरस संक्रमण की मार झेल रहे अधिकतर देश आज भी इसके लिए चीन को दोषी मानते हैं. अमेरिका ने तो कई बार सार्वजनिक तौर पर इस महामारी को चीन की सोची समझी साजिश बताया है. वहीं, पाकिस्तान के चीन के प्रति रुख के कारण अमेरिका के अलावा यूरोपियन देश भी अब पाकिस्तान को चेतावनी दे रहे हैं. सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को जानकारी दी है कि चीन के साथ नजदीकी के कारण पाक को वैश्विक आर्थिक महाशक्तियों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है.

हाल ही में पाकिस्तान की एयरलाइन पीआईए पर यूरोपीय यूनियन ने बैन लगा दिया है. इसके कारण यूरोप में पाकिस्तान के विमान लैंडिंग नहीं कर पायेंगे. पाकिस्तान ने यूरोपीय यूनियन को यह समझाने का पूरा प्रयास किया कि अंतरराष्ट्रीय क्वालीफाईड पायलट्स ही उन मार्गों पर उड़ान भरेंगे. यूरोपीय यूनियन ने पाकिस्तान की किसी भी बात को मानने से साफ इनकार कर दिया. अब आर्थिक मोरचे पर पाकिस्तान चारो ओर से घिरता नजर आ रहा है.

पीएम मोदी के लद्दाख दौरे से पाक में हड़कंप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लद्दाख दौरे से बौखलाए पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने पर चर्चा की. साथ ही कश्मीर मुद्दे और अफगानिस्तान में हालात पर भी बातचीत की. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत में कुरैशी ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति बिगड़ रही है और भारत का ‘आक्रामक रुख’ क्षेत्र की शांति को संकट में डाल रहा है.

कुरैशी ने कहा, ‘भारतीय उकसावों पर पाकिस्तान संयम बरत रहा है.’ उन्होंने भारत पर नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम के उल्लंघन का भी आरोप लगाया. बयान में कहा गया कि कुरैशी ने पाकिस्तान और चीन को ‘सदाबहार रणनीतिक सहयोगात्मक साझेदार’ बताया और कहा कि क्षेत्र में विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से और सहमति के साथ निपटाया जाना चाहिए न कि ‘एकपक्षीय, अवैध और बलप्रयोग’ के जरिए.

Posted By : Amlesh Nandan Sinha.

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