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वंदे भारत एक्सप्रेस दुर्घटना में कोई फंक्शनल हिस्सा क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, भैंस मालिकों के खिलाफ केस दर्ज

Updated at : 07 Oct 2022 4:20 PM (IST)
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वंदे भारत एक्सप्रेस दुर्घटना में कोई फंक्शनल हिस्सा क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, भैंस मालिकों के खिलाफ केस दर्ज

गुरुवार को हुई घटना के बाद, ट्रेन ने गांधीनगर स्टेशन और वापस मुंबई सेंट्रल तक की दूरी क्षतिग्रस्त हिस्से के साथ तय की थी. लेकिन ट्रेन के किसी भी फंक्शनल हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचा.

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मुंबई/अहमदाबाद : गुजरात में मुंबई की ओर से गांधीनगर जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन गुरुवार को अहमदाबाद के पास भैंसों से टकराने के बाद क्षतिग्रस्त हो गई. हालांकि, इस ट्रेन हादसे में किसी प्रकार की जानहानि नहीं हुई. इस बीच शुक्रवार को रेल अधिकारियों ने कहा कि हादसे में क्षतिग्रस्त हुए ट्रेन के अगले हिस्से की मरम्मत कर दी गई है. उन्होंने बताया कि इस हादसे में ट्रेन के फंक्शनल हिस्से को नुकसान नहीं हुआ है. उधर, खबर यह भी है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार भैंस मालिकों के खिलाफ रेवले सुरक्षा बल (आरपीएफ) मामला दर्ज कर लिया है.

इंजन का अगला हिस्सा और माउंटिंग ब्रैकेट क्षतिग्रस्त

पश्चिम रेलवे ने बयान में कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस के एफआरपी (फाइबर प्रबलित प्लास्टिक) से बने इंजन के क्षतिग्रस्त अगले हिस्से की मुंबई में मरम्मत कर दी गई है. पश्चिम रेलवे के ही के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित ठाकुर ने कहा कि भैंसों के झुंड़ से टकराने की घटना में ट्रेन के इंजन का अगला हिस्सा और उसके माउंटिंग ब्रैकेट क्षतिग्रस्त हो गए थे. हालांकि, अन्य हिस्सों को नुकसान नहीं पहुंचा. क्षतिग्रस्त हिस्से की मुंबई सेंट्रल के कोच केयर सेंटर में मरम्मत कर दी गई.

फंक्शनल हिस्से को नुकसान नहीं

उन्होंने बताया कि गुरुवार को हुई घटना के बाद, ट्रेन ने गांधीनगर स्टेशन और वापस मुंबई सेंट्रल तक की दूरी क्षतिग्रस्त हिस्से के साथ तय की थी. लेकिन ट्रेन के किसी भी फंक्शनल हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचा. उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त हिस्से को शुक्रवार को कुछ ही समय में बदल दिया गया और बिना किसी अतिरिक्त देरी के वापस सेवा में लगा दिया गया है.

क्षतिग्रस्त हिस्से की हो गई मरम्मत

पश्चिम रेलवे की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि भैंसों के झुंड से टकराने के बाद क्षतिग्रस्त हुए हिस्से की मुंबई में मरम्मत कर दी गई है. अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में शुरू हुई मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर वंदे भारत ट्रेन गुरुवार की सुबह करीब 11:15 बजे अहमदाबाद के पास ट्रेक पर अचानक आई भैंसों के झुंड से टकरा गई थी. ट्रेन उस समय गांधीनगर की तरफ जा रही थी. हादसे में चार भैंसों की मौत हो गई.

भैंस मालिकों के खिलाफ केस दर्ज

पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ प्रवक्ता (अहमदाबाद मंडल) जितेंद्र कुमार जयंत ने कहा कि आरपीएफ ने अहमदाबाद में वटवा और मणिनगर रेलवे स्टेशनों के बीच वंदे भारत ट्रेन के रास्ते में आने वाली भैंसों के अज्ञात मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. वटवा रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ निरीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि ट्रेन के क्षतिग्रस्त हिस्से के संबंध में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा-147 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि इस घटना के सिलसिले में गुरुवार शाम को प्राथमिकी दर्ज की गई थी. उन्होंने कहा कि रेलवे पुलिस अभी तक भैंसों के मालिकों की पहचान नहीं कर पाई है और इसके लिए प्रयास जारी हैं. घटना अहमदाबाद शहर के बाहरी इलाके में वटवा रेलवे स्टेशन के पास पुनीतनगर इलाके में हुई थी.

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जरूरी कदम उठा रही रेलवे

अधिकारी के मुताबिक, पश्चिम रेलवे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर और मुंबई के बीच चलने वाली सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के नए और उन्नत संस्करण को 30 सितंबर को हरी झंडी दिखाकर इस सेवा की शुरुआत की थी. देश में चलने वाली यह तीसरी वंदे भारत ट्रेन है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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