निठारी हत्याकांड: आरोपी सुरिंदर कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को सजा दिलवाकर रहेगी सीबीआई?

Edited by Amitabh Kumar
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निठारी हत्याकांड: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले साल 17 अक्टूबर को सुरेंद्र कोली और उसके सहयोगी मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया था. जानें मामले का ताजा अपडेट

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निठारी हत्याकांड की चर्चा एक समय में पूरे देश में हो रही थी. मामला उत्तर प्रदेश में नोएडा का था जिसमें आरोपियों पर संगीन आरोप लगाए गये थे, हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रकरण से संबंधित 12 मामलों में मुख्य संदिग्ध सुरिंदर कोली को बरी कर दिया था. सभी 12 मामलों में मौत की सजा ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी. अब खबर है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) 2006 के निठारी हत्याकांड (nithari case) मामले में सुरेंद्र कोली और उसके सहयोगी मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी करने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का मन बना रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जांच एजेंसी ने गाजियाबाद कोर्ट से सभी संबंधित दस्तावेज एकत्रित किये हैं.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा था

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले साल 17 अक्टूबर को सुरेंद्र कोली और उसके सहयोगी मोनिंदर सिंह पंढेर को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष के पास अपराध साबित करने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं. दिल्ली की सीमा से सटे निठारी गांव में व्यवसायी पंढेर के घर के बाहर एक नाले से मानव खोपड़ियां, कंकाल के अवशेष और बोरियों में भरी लापता लड़कियों के कपड़ों के टुकड़े मिले थे जिसके लगभग 17 साल बाद उन्हें बरी कर दिया गया था. जनवरी 2007 में सीबीआई ने उत्तर प्रदेश पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली थी और मामले के तह तक जा रही थी.

निठारी हत्याकांड से जुड़ी खास बातें

मामले के दस्तावेजों की स्टडी सीबीआई ने की

सूत्रों के हवाले से मीडिया में जा खबर चल रही है उसके अनुसार, मामले के दस्तावेजों की स्टडी के साथ-साथ जांच एजेंसी ने सभी कानूनी राय ली है. इसके बाद सीबीआई ने उन दो मामलों को चुनौती देने का फैसला किया है जिनमें कोली को आरोपी के रूप में नामित किया गया है जबकि पंढेर सह-आरोपी है. सीबीआई आने वाले दिनों में आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है.

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निठारी कांड से जुड़ी कुछ खास बातें जानें यहां

  • निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को पहले 12 मामलों में मौत की सजा कोर्ट ने सुनाई थी.
  • आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को भी ट्रायल कोर्ट ने 2 मामलों में मौत की सजा दी थी. खबरें थीं कि कुख्यात निठारी हत्याकांड 2005 और 2006 के बीच किए गए थे.
  • दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी में एक घर के पास नाले में कंकाल पाए गए जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ.
  • मोनिंदर पंढ़ेर के घर का मालिक था जबकि सुरेंद्र कोली के घरेलू नौकर, इस वजह से दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई.
  • सीबीआई ने कुल 16 मामले दर्ज किए. इनमें से सभी में कोली पर हत्या, अपहरण और दुष्कर्म के साथ-साथ सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया गया था.
  • कई पीड़ित परिवारों के संपर्क करने के बाद गाजियाबाद की कोर्ट ने पंढेर को पांच अन्य मामलों में तलब किया था.
  • सीबीआई ने जो बताया था उसके अनुसार, कोली ने कई लड़कियों की निर्मम हत्या की थी. इसके बाद शव के टुकड़े कर दिये थे. इतना करने के बाद शव को घर के पीछे फेंक दिया था.
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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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