यह सांप रात में रहता है एक्टिव, भारत के इस राज्य में मिली रीड स्नेक की नई प्रजाति

Edited by Amitabh Kumar
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रीड सांप की नई प्रजाति की पहचान हुई (Photo: PTI)

Snake Species Identified : देश के मिजोरम राज्य में रीड स्नेक (सरकंडा सांप) की नई प्रजाति की पहचान की गई है. इसकी तस्वीर सामने आई है. शोधकर्ताओं ने फिलहाल इस प्रजाति को आईयूसीएन की रेड लिस्ट के मापदंडों के तहत 'कम चिंताजनक' श्रेणी में रखा है, क्योंकि यह कई जगहों पर पाई जाती है.

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Snake Species Identified : मिजोरम के वैज्ञानिकों की एक टीम ने रूस, जर्मनी और वियतनाम के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर राज्य में रीड स्नेक की एक नई प्रजाति की पहचान की है. इससे लंबे समय से चली आ रही पहचान की पुरानी गलती ठीक हुई है. भारत की सरीसृप जैव-विविधता में एक नई प्रजाति जुड़ी है. इसकी तस्वीर न्यूज एजेंसी पीटीआई ने जारी की है. देखने में यह सांप बहुत ही डरावना नजर आ रहा है.नई प्रजाति का नाम कैलामारिया मिजोरामेंसिस (Calamaria mizoramensis) रखा गया है.

मिजोरम विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर और शोध टीम के प्रमुख एच.टी. लालरेमसांगा ने बताया कि इसका नाम उस राज्य के नाम पर रखा गया है, जहां यह प्रजाति खोजी गई. उन्होंने बताया कि यह शोध विस्तृत शारीरिक जांच और डीएनए विश्लेषण के आधार पर किया गया है. इसके निष्कर्ष सोमवार को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘जूटैक्सा (Zootaxa)’ में प्रकाशित किए गए.

रात में सक्रिय होता है और जमीन के नीचे रहना करता है पसंद

विश्व स्तर पर ‘कैलामारिया’ वंश की 69 प्रजातियां हैं, जिनमें से अधिकांश छोटी और एकांतप्रिय होती हैं. इनके बारे में बहुत कम शोध हुआ है. मिजोरम में मिली यह नयी प्रजाति जहरीली नहीं है और इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं है. अध्ययन के अनुसार, यह सांप रात में सक्रिय होता है और जमीन के नीचे या मिट्टी में दबकर रहना पसंद करता है. यह नम और पहाड़ी जंगली वातावरण में रहता है. इसे समुद्र तल से 670 से 1,295 मीटर की ऊंचाई पर पाया गया है, जिसमें मिजोरम विश्वविद्यालय परिसर जैसे मानव बस्तियों के करीबी इलाके भी शामिल हैं.

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सांप के नमूने सबसे पहले वर्ष 2008 में मिजोरम से एकत्र किए गए

लालरेमसांगा के अनुसार, इस सांप के नमूने सबसे पहले वर्ष 2008 में मिजोरम से एकत्र किए गए थे, लेकिन पहले इन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली एक व्यापक प्रजाति का हिस्सा माना जाता था. उन्होंने कहा कि नए अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि मिजोरम में पाई जाने वाली सांपों की यह आबादी एक अलग और विशिष्ट विकासात्मक वंश का प्रतिनिधित्व करती है, जो केवल इसी राज्य में मौजूद है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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