Locust Attack in Delhi : राष्ट्रीय राजधानी में दस किलोमीटर लंबे टिड्डी दल का हमला, ATS ने पायलट को किया अलर्ट, देखें वीडियो

Updated at : 27 Jun 2020 1:15 PM (IST)
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Locust Attack in Delhi : राष्ट्रीय राजधानी में दस किलोमीटर लंबे टिड्डी दल का हमला, ATS ने पायलट को किया अलर्ट, देखें वीडियो

Locust attack, Tiddi Dal Hamla, Delhi-NCR, ATS alert Pilot : कोरोना महामारी के बीच टिड्डियों का हमला जारी है. खबर आ रही है कि दिल्ली में टिड्डी दल ने हमला कर दिया है. पड़ोसी जिले गुरुग्राम से होते हुए यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंच गए है. इसे लेकर किसान चिंतित है और उन्हें लगातार भगाने की कोशिश की जा रही है. बताया जा रहा है कि इनकी झुंड करीब दस किलो मीटर लंबी है और इसे लेकर एटीएस ने हवाई जहाजों को टेक ऑफ करते समय विशेष ध्यान देने को कहा है. एक वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डागर के पास इसे लेकर कई किसान कॉल भी कर चुके है.

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Locust attack, Tiddi Dal Hamla, Delhi-NCR, ATS alert Pilot : कोरोना महामारी के बीच टिड्डियों का हमला जारी है. खबर आ रही है कि दिल्ली में टिड्डी दल ने हमला कर दिया है. पड़ोसी जिले गुरुग्राम से होते हुए यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंच गए है. इसे लेकर किसान चिंतित है और उन्हें लगातार भगाने की कोशिश की जा रही है. बताया जा रहा है कि इनकी झुंड करीब दस किलो मीटर लंबी है और इसे लेकर एटीएस ने हवाई जहाजों को टेक ऑफ करते समय विशेष ध्यान देने को कहा है. एक वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डागर के पास इसे लेकर कई किसान कॉल भी कर चुके है.

इस वर्ष टिड्डियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में हमला किया है. आपको बता दें कि टिड्डी दल पूरी फसल को नष्ट कर देते है. इस वर्ष सबसे यह पाकिस्तान से राजस्थान होते हुए पूरे देश में जा पहुंची है. इधर, दिल्ली में पहुंचने के बाद एटीएस ने एयर प्लेनों को टेक ऑफ करते समय विशेष ध्यान रखने की हिदायत भी दी है. आपको बता दें कि हवाई जहाजों के बीच कोई पक्षी या कीड़ों के झुंड के आने से विमान दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है. जहां टिड्डी दल पहुंचे है वहीं पर एयरपोर्ट भी है.

पहले कैसे खेत को बचाते थे किसान

टिड्डियों से सबसे ज्यादा खतरा किसानों को होता है. पूर्व के वर्षों में टिड्डियों से फसल को बचाने के लिए किसान विभिन्न उपायों को अपनाते थे. जिस खेत में वे डेरा डालते थे वहां किसान थोड़ी दूर पर एक बड़ा गड्ढ़ा खोद देते थे. यहां तक कि जिस पेड़ पर टिड्डियां डेरा जमाती थी, उसके सारे पत्ते खा जाती थी. जैसे ही टिड्डी दल उस गड्ढ़े की ओर बढ़ते थे उपर से मिट्टी डाल दी जाती थी.

फिलहाल, विभिन्न तरह के पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करके खेतों को बचाने की कोशिश की जा रही है. खबरों की मानें तो 1952 के बाद पहली बार है जब टिड्डी दलों ने हमला किया है.

कैसै होती है टिड्डियों की उत्पत्ती

विशेषज्ञों की मानें तो टिड्डियों के भारी संख्या में पनपने का मुख्य कारण लगातार मौसम में आ रहे बदलाव है. एक मादा टिड्डी तीन बार तक अंडे दे सकती है. सबसे बड़ी बात यह है कि ये एक बार में करीब 100-150 अंडे तक दे सकती है. टिड्डियों के एक वर्ग मीटर में एक हजार अंडे हो सकते हैं. इनका जीवनकाल तीन से पांच महीनों का होता है. नर टिड्डे का आकार 60-75 एमएम और मादा का 70-90 एमएम तक हो सकता है.

Posted By: Sumit Kumar Verma

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