NEET में रिजर्वेशन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक शुरू नहीं होगी काउंसिलिंग की प्रक्रिया, केंद्र का आश्वासन

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केंद्र ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि कोर्ट के फैसले के बाद ही काउंसिलिंग शुरू की जायेगी. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एम के नटराज के इस आश्वासन को दर्ज किया

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NEET पीजी की काउंसिलिंग तब तक शुरू नहीं होगी जबतक कि सुप्रीम कोर्ट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी अधिसूचना को दी गयी चुनौती के संबंध में फैसला नहीं कर लेती.

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उक्त बातें केंद्र सरकार की ओर से आज सुप्रीम कोर्ट में कही गयी. केंद्र ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि कोर्ट के फैसले के बाद ही काउंसिलिंग शुरू की जायेगी. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एम के नटराज के इस आश्वासन को दर्ज किया और टिप्पणी की कि यदि काउंसलिंग प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे छात्रों के लिए बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी.

नीट-पीजी के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया 25 अक्टूबर से शुरू होनी थी, जब अधिसूचना को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने इस मामले को उठाया तो केंद्र ने काउंसिलिंग शुरू ना करने का आश्वासन दिया.

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पीठ ने कहा कि वह इन शब्दों को रिकॉर्ड में रख रही है. उसने कहा, हम आपके इन शब्दों को दर्ज कर रहे हैं कि याचिकाओं पर हमारा कोई फैसला आने तक काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं की जायेगी. आप जानते हैं कि यदि यह प्रक्रिया शुरू होती है, तो छात्रों को गंभीर समस्या होगी.

नटराज ने न्यायालय की इस टिप्पणी के प्रति सहमति जताई और कहा कि यदि भविष्य में कोई समस्या होती है, तो याचिकाकर्ता के वकील उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं. न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या वह नीट या मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के निर्धारण के लिए आठ लाख रुपये वार्षिक आय की सीमा तय करने पर पुनर्विचार करेगी.

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह नीति निर्धारण के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर रही है, बल्कि केवल यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही है कि क्या संवैधानिक मूल्यों का पालन किया गया है अथवा नहीं. शीर्ष अदालत ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से एक सप्ताह में अपने हलफनामे दाखिल करने को कहा था और केंद्र के लिए कुछ सवाल बनाए थे.

सुप्रीम कोर्ट उन कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें केंद्र और मेडिकल काउंसिलिंग समिति (एमसीसी) की 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती दी गई है. इस अधिसूचना के तहत मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए नीट में ओबीसी को 27 फीसदी और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया है.

Posted By : Rajneesh Anand

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