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देश में कोरोना महामारी के कारण लाखों लोगों की मौत हुई है. लाखों परिवार इससे प्रभावित हुए हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जिन्हें कोरोना से जुड़े कानूनों की जानकारी नहीं है. ऐसे लोगों की मदद करने के लिए बेंगलुरु में एक न्याय के नाम से एक पहल की गयी है. जहां विभिन्न प्लेटफॉर्म के जरिये कोरोना से संबंधित कानूनी जानकारी आम नागरिक को मिल सकती है.

कोरोना से जुड़े कानूनी नियम और सरकारी राहत की जानकारी चाहते हैं तो आपके लिए है ‘न्याय’, जानें यहां

देश में कोरोना महामारी के कारण लाखों लोगों की मौत हुई है. लाखों परिवार इससे प्रभावित हुए हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जिन्हें कोरोना से जुड़े कानूनों की जानकारी नहीं है. ऐसे लोगों की मदद करने के लिए बेंगलुरु में एक न्याय के नाम से एक पहल की गयी है. जहां विभिन्न प्लेटफॉर्म के जरिये कोरोना से संबंधित कानूनी जानकारी आम नागरिक को मिल सकती है.

अगर किसी नागरिक को कोरोना से संबंधित नियम और कानून की की जानकारी जैसे, अगर किसी के परिवार में कोरोना से किसी सदस्य की मौत हो गयी है तो क्या उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद मिल सकती है, जैसे सवालों के लिए न्याय के वेबसाइट www.nyaaya.org पर लॉग इन करने जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा इस नंबर पर +91 9650108107 पर फोन करके जानकारी हासिल कर सकते हैं.

बेंगलुरु में इसकी शुरुआत अर्घ्यम फाउंडेशन के चेयरमैन रोहीणी नीलकेणी ने किया है. विधि सेंटर फॉर लिगेसी से उन्हें सहयोग मिला है. इनका लक्ष्य है कि आम नागरिकों को डिजिटल और यादगार तरीके से कोरोना से जुड़े कानून और उनके अधिकारों की जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर मिल जाए. ताकि वो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सके.

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न्याय में लोगों को अनुभवों के अधार पर और कानून के शब्दों में लोगों को जानकारी मिलेगी. ध्यान रखें कि यह आपको अदालत में अपनी समस्या का समाधान करने के लिए लीगल सलाह नहीं देगी. न्याय की टीम लीडर अनिशा गोपी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि न्याय की टीम अलग अलग क्षेत्रों में और प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य करने वाले वकीलों से बनी है.

अनिशा ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान टीम ने महसूस किया की कोरोना से जुड़े अधिक से अधिक सवालों का जवाब देकर हम अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं. इसके लिए हमने व्हाट्सएप का भी इस्तेमाल किया ताकि ग्रामीणों को भी आसानी से जानकारी मिल जाए.

न्याय में हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, ओड़िया, बांग्ला और गुजराती भाषा में जानकारी मिल रही है. इसके अलावा इसकी मांग को देखते हुए लगभग 100 वकीलों और 25 शहरी छात्रों के साथ मिलकर क्षेत्रीय भाषा में इसके विस्तार की योजना बना रहे हैं.

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Posted By: Pawan Singh

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