मणिपुर में असम राइफल्स ने पुलिस को लिखा पत्र, किया चौंकाने वाला दावा

असम राइफल्स (Assam Rifles In Manipur) ने मणिपुर पुलिस को पत्र लिखकर कहा है कि काकचिंग जिले में कई ट्रकों पर अर्धसैनिक बल के वाहनों के रंग की तरह पेंट किया गया है और उन पर उसका प्रतीक चिह्न भी लगाया गया है.
Assam Rifles In Manipur: मणिपुर हिंसा की घटनाएं अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. बीते कई महीनों से जारी विवाद में आए दिन हादसों की खबरें आ रही है. ऐसे में असम राइफल्स की ओर से पुलिस को पत्र लिखा गया है जिससे चिंता की लकीरें फिर खींच गई है. बता दें कि असम राइफल्स (Assam Rifles In Manipur) ने मणिपुर पुलिस को पत्र लिखकर कहा है कि काकचिंग जिले में कई ट्रकों पर अर्धसैनिक बल के वाहनों के रंग की तरह पेंट किया गया है और उन पर उसका प्रतीक चिह्न भी लगाया गया है. यह जानकारी पुलिस के एक अधिकारी ने मीडिया सूत्रों को दी है. अर्धसैनिक बल ने चुराचांदपुर के पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में दावा किया कि कुछ लोगों ने घाटी स्थित उग्रवादी समूहों (वीबीआईजी) की मदद से बाजार से कई ट्रक खरीदे और उन्हें असम राइफल्स के वाहनों के रंग से पेंट किया और बल का प्रतीक चिह्न लगाया, ताकि ये ट्रक अर्धसैनिक बल के वाहनों की तरह प्रतीत हों.
बता दें कि पुलिस को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि असैन्य वाहनों में बदलाव कर उन्हें असम राइफल्स (Assam Rifles In Manipur) के वाहनों की तरह बनाना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वीबीआईजी की असम राइफल्स की छवि को खराब करने या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए इनका उपयोग करने की नापाक मंशा है. साथ ही असम राइफल्स ने अपने पत्र में चुराचांदपुर पुलिस से काकचिंग जिले के पुलिस अधीक्षक और उच्च अधिकारियों को भी इसकी सूचना देने को कहा है ताकि किसी भी प्रकार की प्रतिकूल घटना को रोकने के लिए एहतियातन कार्रवाई की जा सके.
मणिपुर में मई की शुरुआत में जातीय हिंसा भड़कने के बाद निलंबित की गई मोबाइल इंटरनेट सेवाएं चार महीने से अधिक समय के बाद शनिवार से बहाल कर दी गईं. एक अधिकारी ने कहा कि मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अपराह्न तीन बजे बहाल कर दी गईं. इससे कुछ घंटे पहले मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने पूर्वोत्तर राज्य में निलंबित मोबाइल इंटरनेट सेवाएं आज से बहाल किए जाने की घोषणा की थी. एन. बीरेन सिंह ने मुक्त आवाजाही व्यवस्था को रद्द करने का भी आह्वान किया, जिसके तहत भारत-म्यांमार सीमा के पास दोनों ओर रह रहे लोगों को बिना किसी दस्तावेज के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर तक भीतर जाने की अनुमति है.
एन. बीरेन सिंह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सरकार ने फर्जी समाचार, दुष्प्रचार और नफरत फैलाने वाली सामग्री का प्रसार रोकने के लिए तीन मई को मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी थीं, लेकिन स्थिति में सुधार होने के कारण मोबाइल इंटरनेट सेवाएं आज से राज्यभर में बहाल की जाएंगी.’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ‘‘अवैध प्रवासियों’’ के आने की समस्या से निपटना जारी रखेगी. उन्होंने भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने की आवश्यकता पर बल दिया.
जैसा कि आपको पता हो कि मणिपुर में चार महीने से अधिक समय से जातीय हिंसा जारी है. अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च के बाद तीन मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़क गई थी. हिंसा की घटनाओं में अब तक 175 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों अन्य लोग घायल हुए हैं. मणिपुर की आबादी में मेइती समुदाय के लोगों की आबादी लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी आदिवासियों की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है और वे ज्यादातर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.
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By Aditya kumar
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