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क्या NDA के 400 प्लस के लक्ष्य को रोक पाएगा विपक्ष, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल कितना दे पाएंगे चुनौती ?

Updated at : 01 Mar 2024 5:22 AM (IST)
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क्या NDA के 400 प्लस के लक्ष्य को रोक पाएगा विपक्ष, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल कितना दे पाएंगे चुनौती ?

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां बिसात बिछाने में जुट गयी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है.

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18वीं लोकसभा के चुनाव की तारीखों के एलान का जल्द ही होने वाला है. राजनीतिक दलों से लेकर आम आदमी तक, सभी को निर्वाचन आयोग की घोषणा का इंतजार है. 2019 में 10 मार्च को चुनाव की अधिसूचना जारी हुई थी, 11 अप्रैल से 19 मई तक, सात चरणों में मतदान हुआ था, 23 मई को नतीजे आये थे. इस बार भी लोकतंत्र का यह महापर्व कई मायने में अहम होगा. पांच वर्षों में देश की परिस्थिति और परिप्रेक्ष्य, राजनीतिक समीकरण और सोच, मुद्दे, मतदाताओं की रुचि और रुझान में बहुत कुछ बदलाव आया है. इन बदलावों को लेकर चुनावी समीकरण भी बदलेंगे और तस्वीर भी बदलेगी. इन तमाम विषयों को लेकर हम विशेष शृंखला शुरू करेंगे. पेश है, लोकसभा चुनाव पर केंद्रित यह कर्टेन रेजर.

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां बिसात बिछाने में जुट गयी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है. उन्होंने भाजपा के लिए 370 और एनडीए के 400 प्लस का लक्ष्य तय किया है. यानी पिछले चुनाव नतीजे के मुकाबले इस बार भाजपा को और 67 सीटें जीतनी हैं. भाजपा के सहयोगी दलों के पास अभी 48 सीटें हैं. अगर ये दल इस आंकड़े को बरकरार रखते हैं, तो एनडीए 400 से ज्यादा सीटें हासिल कर जायेगा. हालांकि विपक्ष तमाम बिखराव के बावजूद भाजपा की बढ़त को रोकने की सभी संभावनाएं तलाशने में जुटा है. कांग्रेस पार्टी चुनावी समर में कमर कस चुकी है.

कई राज्यों में उसे क्षेत्रीय दलों का साथ मिला है. उप्र और मप्र में सपा उसके साथ आयी है. उसे ‘आप’ का भी साथ मिला है, जिसमें दिल्ली में कांग्रेस ने अपने लिए सात में से तीन सीटों पर संभावना तलाशी है, जबकि केरल, हरियाणा, गुजरात, गोवा और चंडीगढ़ में उसने अपने हिस्से में ज्यादा सीटें रखी हैं. नागपुर अधिवेशन में पार्टी ने चुनावी रणनीति तय की. राहुल गांधी 6200 किमी की भारत न्याय यात्रा पर हैं. उसे इन सब से बड़ी कामयाबी का भरोसा है. बसपा जैसी कुछ पार्टियों ने अकेले चुनाव लड़ने का एलान किया है. क्षेत्रीय दल भी अपनी जमीन का आकलन कर रणनीति बनाने में जुटे हैं. बहरहाल, सबकी नजरें फिलवक्त चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जिसे चुनाव की तारीखों का एलान करना है.

यहां भाजपा को सभी सीटें

भाजपा को 2014 के मुकाबले 2019 में ज्यादा सीटें मिलीं. करीब दर्जनभर राज्यों में उसके नतीजे में बढ़त रही. राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और त्रिपुरा में उसने करीब-करीब सभी सीटें जीतीं.

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