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बदलेगी कश्मीर की पहचान, कश्मीर के युवा अब जवानों की बचाएंगे जान

By संवाद न्यूज एजेंसी
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कश्मीर
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सोशल मीडिया

अबतक पत्थरबाजी ही कश्मीर के युवाओं की पहचान रही हैं लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. मासूमों और निर्दोष लोगों की जान लेने के लिए उठने वाले हाथों में इलाज के उपकरण सौंपने की तैयारी चल रही है. जम्मू कश्मीर में मेडिकल सीटों की संख्या दोगुना बढ़ाई गई है ताकि हर साल बड़ी संख्या में जान बचाने वाले डाक्टरों की फौज खड़ी की जा सके .

जम्मू कश्मीर में एमबीबीएस की 160 सीटें बढ़ने जा रही हैं. इसे जम्मू-कश्मीर में सीटों की संख्या 1145 हो जाएगी. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार दो साल में एमबीबीएस की सीटें दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएंगी. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्त आयुक्त अटल डुल्लू ने कहा कि जीएमसी डोडा में अतिरिक्त 100 सीटें मिल सकती हैं. मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है.

जीएमसी कठुआ, जीएमसी राजोरी, जीएमसी अनंतनाग और जीएमसी बारामुला में भी 15 सीटें बढ़ने की उम्मीद है. डुल्लू ने कहा कि सीटें बढ़ाने की बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा चुका है. इस पर एमसीआई ने भी संतुष्टि जाहिर की है. अब केवल औपचारिक मंजूरी पत्र आने का ही इंतजार है. विजयपुर और अवंतीपोरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने की कवायद चल रही है. फिलहाल 50 सीटों की उम्मीद की जा रही है. अवंतीपोरा एम्स को अस्थायी भवन में अगले साल से शुरू किया जा सकता है.

एमसीआई ने जून 2019 में कठुआ, राजोरी, बारामुला और अनंतनाग जीएमसी में अतिरिक्त 400 सीटें मंजूर की थीं. डोडा जीएमसी में भवन निर्माण न होने की वजह से यहां कक्षाएं शुरू करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई. जम्मू-कश्मीर को 2012 में केंद्र से पांच मेडिकल कॉलेज मिले थे, लेकिन 2019 तक इन संस्थानों में जरूरी सुविधाएं नहीं दी जा सकी थीं. नए मेडिकल कॉलेज मंजूर होने के साथ ही प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 85 सीटें आरक्षित की गई हैं.

Posted By - Pankaj Kumar Pathak

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