कैबिनेट विस्तार पर कर्नाटक में खींचतान! सिद्दारमैया और शिवकुमार के लिए बनी सिरदर्द, जानिए कहां फंसा है पेंच

Published by : Pritish Sahay Updated At : 24 May 2023 2:09 PM

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सिद्धारमैया और शिवकुमार ने 20 मई को आठ मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन अभी तक किसी मंत्री को विभाग नहीं मिला है. साथ ही कैबिनेट विस्तार भी नहीं हुआ है. ऐसे में इन मुद्दों पर चर्चा के लिए सिद्धारमैया और शिवकुमार आज फिर दिल्ली जा रहे हैं.

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कर्नाटक में नयी गठित सरकार के सामने अब सबसे बड़ी समस्या मंत्रिमंडल विस्तार की है. इसी को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार आज यानी बुधवार देर शाम नई दिल्ली जाने वाले हैं. दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ कर्नाटक राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और मौजूदा मंत्रियों को विभागों के आवंटन पर चर्चा करने की संभावना है. सिद्धारमैया विशेष विमान से शाम साढ़े छह बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे. उनके साथ डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी होंगे.

मुख्यमंत्री करेंगे कैबिनेट विस्तार: इधर कैबिनेट विस्तार को लेकर मीडिया से हुई बातचीत में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि कैबिनेट विस्तार मुख्यमंत्री की ओर से किया जाएगा. शिवकुमार ने कहा कि उनके पास अधिकार है, कांग्रेस पार्टी ने उन्हें अधिकार दिया है. वह जवाब देने के लिए सही व्यक्ति हैं. शिवकुमार ने पत्रकारों से कहा कि यह सवाल के लिए कृपया उनसे मिलें.

सिद्धारमैया और शिवकुमार में मतभेद: गौरतलब है कि कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार ने 20 मई को आठ मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन अभी तक इन मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा नहीं किया गया है. कांग्रेस सूत्रों की मानें तो पार्टी आलाकमान ने पिछले हफ्ते शपथ ग्रहण समारोह से पहले दिल्ली में हुई बैठक में आठ मंत्रियों की पहली सूची को मंजूरी दी थी, जबकि पहले मंत्रिमंडल में बड़ी संख्या में विधायकों को शामिल किए जाने की योजना है.

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सिद्धारमैया ने सामने काफी बड़ी चुनौती: मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मंत्रिमंडल में विधायकों के नामों को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच मतभेद है. नए मंत्रियों को विभागों का आवंटन और एक ऐसे मंत्रिमंडल का गठन, जिसमें सभी समुदायों, क्षेत्रों, गुटों और नयी व पुरानी पीढ़ी के विधायकों को प्रतिनिधित्व हासिल हो, सिद्धारमैया के लिए काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है. सबसे बड़ी बात की कर्नाटक मंत्रिमंडल में मंत्रियों की स्वीकृत संख्या 34 है. इसे देखते हुए कई नेता मंत्री बनने की होड़ में शामिल हैं.

भाषा इनपुट से साभार

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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