Justice Yashwant Varma Case : कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 07 Aug 2025 10:48 AM

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सुप्रीम कोर्ट

Justice Yashwant Varma Case : सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का आचरण विश्वास से परे है, उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए.

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Justice Yashwant Varma Case : सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज हो गई है. कैश कांड के बाद उन्होंने शीर्ष कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने तीन जजों की इन-हाउस जांच समिति की रिपोर्ट और पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की उनके खिलाफ महाभियोग की सिफारिश को चुनौती दी थी. कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार किया.

जस्टिस यशवंत वर्मा ने इन-हाउस जांच रिपोर्ट को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें ‘केस एट होम’ विवाद में दोषी ठहराया गया था. पीठ में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह शामिल थे. उन्होंने 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे गुरुवार को सुनाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को पत्र भेजा जाना असंवैधानिक नहीं था.

यह भी पढ़ें : जस्टिस वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा-आपका आचरण विश्वास करने लायक नहीं…

सुनवाई के दौरान याचिका पर कई गंभीर सवाल उठाए सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिका पर कई गंभीर सवाल उठाए. पीठ ने पूछा कि जब प्रक्रिया गलत लगी, तो जांच में भाग क्यों लिया? आप पहले ही इसे चुनौती दे सकते थे. आपकी कार्रवाई से लगता है कि आपने नतीजे की उम्मीद में इंतजार किया. कोर्ट ने यह भी कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय सिर्फ डाकघर नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सूचना देना उनकी जिम्मेदारी होती है.

यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास पर लग गई थी आग

मार्च 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहते हुए यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास पर आग लग गई थी. आग बुझाने के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में आधे जले हुए नकदी के नोट बरामद हुए, जिससे मामला गंभीर हो गया. तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तीन न्यायाधीशों की इन-हाउस जांच समिति गठित की थी. समिति ने 55 गवाहों के बयान और वीडियो-फोटो साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार को नकदी की जानकारी थी.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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