चंद्रयान-3 की सफल लॉचिंग के बाद ISRO का एक और मिशन, PSLV-C56 छह उपग्रहों के साथ अंतरिक्ष के लिए होगा रवाना

Published by : Pritish Sahay Updated At : 24 Jul 2023 1:46 PM

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ISRO Mission: इसरो अपने लॉन्च व्हीकल PSLV-C 56 के जरिये श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड से अंतरिक्ष में भेज रहा है. PSLV-C56 अपने साथ 360 किलोग्राम वजन के DS-SAR सैटेलाइट को 5 डिग्री झुकाव और 535 किलोमीटर की ऊंचाई पर निकट-भूमध्यरेखीय कक्षा में लॉन्च करेगा.

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ISRO Mission: चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो (ISRO) अब अपने नये मिशन की जोर शोर से तैयारी कर रहा है. जल्द  ही इसरो नया मिशन लॉन्च करेगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 30 जुलाई को छह सह-यात्री उपग्रहों के साथ PSLV-C 56 मिशन लॉन्च कर रहा है. इसरो ने बताया कि छह सह-यात्री उपग्रहों के साथ PSLV-C 56 को 30 जुलाई को सुबह साढ़े 6 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा. इसरो की ओर से कहा गया है कि पीएसएलवी-सी 56 सिंगापुर की डीएसटीए एवं एसटी इंजीनियरिंग के डीएस-एसएआर उपग्रह और छह अन्य उपग्रहों को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा.

इस सैटेलाइट को इसरो अपने लॉन्च व्हीकल PSLV-C 56 के जरिये श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड से अंतरिक्ष में भेज रहा है. PSLV-C56 अपने साथ 360 किलोग्राम वजन के DS-SAR सैटेलाइट को 5 डिग्री झुकाव और 535 किलोमीटर की ऊंचाई पर निकट-भूमध्यरेखीय कक्षा में लॉन्च करेगा. गौरतलब है कि चंद्रयान-3 को हाल में ही इसरो ने चांद के लिए रवाना किया है. पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा करने के बाद वो अगले महीने यानी अगस्त में चांद की धरती पर लैंड करेगा.

इसरो ने पूरी की चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की चौथी प्रक्रिया
गौरतलब है कि इसरो का चंद्रयान-3 चांद पर पहुंचने का कवायद में है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिकों ने गुरुवार को ही चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की चौथी कवायद सफलतापूर्वक पूरी कर ली थी. इसरो ने यह काम टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क से किया. अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इस तरह की अगली कवायद 25 जुलाई को दो दो और तीन बजे के बीच किए जाने की योजना है. इसने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय चंद्रमा दिवस के अवसर पर चंद्रयान-3 को चंद्रमा के और करीब पहुंचा दिया है. बता दें, चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था. इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 को लेकर कहा कि लैंडर को 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है.

अमेरिका, रूस और चीन की बराबरी कर लेगा भारत
बता दें, भारत ने 14 जुलाई को LVM3-M4 रॉकेट के जरिये अपने तीसरे मून मिशन यानी चंद्रयान-3 की सफल लॉन्चिंग की. चंद्रयान-3  41 दिन की अपनी यात्रा में चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेगा. बता दें दक्षिणी ध्रुव पर अभी तक किसी देश ने सॉफ्ट लैंडिंग नहीं की है. चांद की सतह पर अबतक अमेरिका, पूर्व सोवियत संघ और चीन सॉफ्ट लैंडिंग कर चुके हैं. लेकिन, उनकी सॉफ्ट लैंडिंग चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर नहीं हो सकी है. वहीं, अगर इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) का 600 करोड़ रुपये का चंद्रयान-3 मिशन चार साल में अंतरिक्ष एजेंसी के दूसरे प्रयास में लैंडर को उतारने में सफल हो जाता है, तो अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद भारत चांद की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग की तकनीक में सफलता प्राप्त करने वाला चौथा देश बन जाएगा.

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क्यों लग रहा है 42 दिनों का समय
गौरतलब है कि नासा (NASA) ने अपने स्पेसशिप को महज चार दिनों से लेकर एक हफ्ते के अंदर ही चंद्रमा पर पहुंचा देता है. चीन ने भी इतने ही समय में अपने यान को चांद पर पहुंचा दिया था. वहीं भारत को ऐसा करने में 40 से लेकर 42 दिनों का समय लग रहा है. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. इस सवाल के जवाब में वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के चारों तरह घुमा कर स्पेसशिप को गहरे स्पेस में भेजने का प्रोसेस काफी किफायती होती है. नासा (NASA) के प्रोजेक्ट से अगर तुलना की जाए तो ISRO के प्रोजेक्ट्स काफी सस्ते होते हैं. केवल यहीं एक कारण यह भी है कि ISRO के पास फिलहाल NASA जितने बड़े और पावरफुल राकेट मौजूद नहीं हैं जिसे सीधे तौर पर चंद्रमा के ऑर्बिट में भेजा जा सके.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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