भारतीय सेना की 39 महिला अधिकारों ने हासिल की बड़ी जीत, मिलेगा स्थायी कमीशन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Oct 2021 12:57 PM
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जिन महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन नहीं देने का फैसला किया है उन पर लिखित में एफिडेफिट दें कि क्या हमारे फैसले में उन सभी का स्थाई कमीशन कवर नहीं होता है.
भारतीय सेना की 39 महिला अफसरों के हाथ बड़ी जीत लगी है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इन महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया है. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के साथ – साथ इसे जल्द पूरा करने का भी आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि अन्य 25 महिला अफसरों को किस आधार पर स्थायी कमीशन नहीं दिया गया. इसकी विस्तृत जानकारी मांगी है.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जिन महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन नहीं देने का फैसला किया है उन पर लिखित में एफिडेफिट दें कि क्या हमारे फैसले में उन सभी का स्थाई कमीशन कवर नहीं होता है.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन और वरिष्ठ वकील आर बालासुब्रममण्यन ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच को बताया है कि 72 में से एक महिला अफसर ने सर्विस से रिलीज करने की अर्जी दी है. इसलिए सरकार ने 71 मामलों पर पुनर्विचार किया है. इनमें से 39 स्थायी कमीशन की पात्र पाई गई हैं.
केंद्र सरकार ने भी इस संबंध में बताया है कि 71 में से 39 को स्थायी कमीशन दिया जा सकता है. इसके साथ ही केंद्र ने कहा कि 71 में से 7 चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त हैं, जबकि 25 के खिलाफ अनुशासनहीनता के गंभीर मामले हैं .
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले महिला अधिकारियों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 8 अक्टूबर को कहा था कि सेना इसे अपने स्तर से सुलझा ले. अगर ऐसा नहीं होता तो इस संबंध में हमें आदेश देना होगा.
महिला अधिकारियों ने इस संबंध में जानकारी दी है कि 25 मार्च 2021 को फैसला सुनाया है. जिन महिलाओं के स्पेशल सेलेक्शन बोर्ड में 60 फीसदी अंक से मिले हैं और जिनके खिलाफ डिसिप्लिन और विजिलेंस के मामले नहीं हैं उन महिला अधिकारियों को सेना परमानेंट कमीशन दें. 10 अगस्त को इन महिलाओं ने रक्षा मंत्रालय और सेना को कानूनी नोटिस भेजा था, उसका भी कोई जवाब नही मिला तब जाकर इन महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
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