Bhargavastra: अब चीन-पाकिस्तान की खैर नहीं, भारत के भार्गवास्त्र से आसमान में ही नष्ट हो जाएंगे सैकड़ों ड्रोन

Bhargavastra counter swarm drone system
Bhargavastra: पाकिस्तान के साथ जारी तनाव के बीच भारत ने काउंटर ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र का सफल परीक्षण किया. इसे सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) ने विकसित किया है, जो हार्ड किल मोड में कम लागत वाला काउंटर ड्रोन सिस्टम है. इसकी ताकत ऐसी है, जिसे देखकर पाकिस्तान और चीन के रातों की नींद उड़ जाएगी. यह ड्रोन झुंडों के बढ़ते खतरे का मुकाबला करने में कामयाब है.
Bhargavastra: काउंटर ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र में प्रयुक्त सूक्ष्म रॉकेटों का गोपालपुर स्थित सीवार्ड फायरिंग रेंज में परीक्षण किया गया, जिसमें सभी निर्धारित लक्ष्य प्राप्त हुए. 13 मई को गोपालपुर में आर्मी एयर डिफेंस (एएडी) के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में रॉकेट के तीन परीक्षण किए गए. दो टेस्ट एक-एक रॉकेट दागकर किए गए. एक टेस्ट 2 सेकंड के भीतर साल्वो मोड में दो रॉकेट दागकर किया गया. सभी चार रॉकेटों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया.
#WATCH | A new low-cost Counter Drone System in Hard Kill mode 'Bhargavastra', has been designed and developed by Solar Defence and Aerospace Limited (SDAL), signifying a substantial leap in countering the escalating threat of drone swarms. The micro rockets used in this… pic.twitter.com/qM4FWtEF43
— ANI (@ANI) May 14, 2025
भार्गवास्त्र एक साथ कई ड्रोन को पलक झपकते कर देगा तबाह
काउंटर ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र एक साथ ड्रोनों की झूंड को तबाह कर सकता है. भार्गवस्त्र 2.5 किमी तक की दूरी पर छोटे, आने वाले ड्रोन का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में कामयाब है. भार्गवास्त्र भारतीय सेना की ताकत को और बढ़ा देगा. यह ड्रोनों की झूंड को सेकेंड भर में बेअसर कर सकता है. यह काउंटर ड्रोन सिस्टम मॉड्यूलर है, सेंसर (रडार, ईओ और आरएफ रिसीवर) और शूटर को उपयोगकर्ता की आवश्यकता के अनुसार कॉन्फिगर किया जा सकता है और इसे लेयर्ड और टियर्ड एडी कवर के लिए एकीकृत तरीके से काम करने के लिए बनाया जा सकता है. जिससे लंबी दूरी पर लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है.
भार्गवास्त्र में लगे रडार 6 से 10 किमी दूर से छोटे हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम
C4I (कमांड, कंट्रोल, संचार, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) तकनीक से युक्त कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर से लैस, सिस्टम का रडार 6 से 10 किमी दूर से छोटे हवाई खतरों का पता लगा सकता है. इसका इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (ईओ/आईआर) सेंसर सूट लो रडार क्रॉस-सेक्शन (एलआरसीएस) लक्ष्यों की सटीक पहचान करता है.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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