भारत ने UNSC में जाहिर की चिंता, काला सागर खाद्यान्न समझौता निलंबित होने से दुनिया में बढ़ेंगी चुनौतियां

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 01 Nov 2022 6:50 PM

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर आर मधुसूदन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रयासों के परिणामस्वरूप हुए खाद्यान्न समझौते का उद्देश्य वैश्विक खाद्य संकट को टालना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

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नई दिल्ली : भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में खाद्य सुरक्षा को लेकर काला सागर खाद्यान्न समझौते को निलंबित किए जाने पर चिंता जाहिर की है. इस काला सागर खाद्यान्न समझौते की मध्यस्थता खुद संयुक्त राष्ट्र ने ही की थी. यूएनएससी में भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए काला सागर अनाज समझौते को निलंबित किए जाने से दुनिया के सामने मौजूद खाद्य सुरक्षा, ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति संबंधी चुनौतियां और बढ़ने की आशंका है. इस समझौते के तहत रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन से खाद्य सामग्री का निर्यात किया जा रहा था.

समझौता निलंबन से दुनिया में पैदा होगा खाद्यान्न संकट

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर आर मधुसूदन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रयासों के परिणामस्वरूप हुए खाद्यान्न समझौते का उद्देश्य वैश्विक खाद्य संकट को टालना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है. काला सागर खाद्यान्न समझौते पर सोमवार को सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग के दौरान मधुसूदन ने कहा कि काला सागर खाद्यान्न समझौते और पक्षों के बीच सहयोग ने अब तक यूक्रेन में शांति के लिए आशा की एक किरण पैदा की थी. हमारा मानना ​​​​है कि काला सागर खाद्यान्न समझौते के निलंबन से दुनिया और विशेष रूप से दक्षिणी हिस्से के सामने खाद्य सुरक्षा, ईंधन और उर्वरक आपूर्ति चुनौतियां और बढ़ने की आशंका है.

रूस ने समझौता किया निलंबित

आर मधुसूदन ने कहा कि भारत यूक्रेन व रूस से खाद्य एवं उर्वरक के निर्यात की सुविधा शुरू करने और समझौते को नया रूप देकर उसके पूर्ण कार्यान्वयन की संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस की अपील का समर्थन करता है. रूस ने क्रीमिया प्रायद्वीप में स्थित यूक्रेन के बंदरगाह सेवस्तोपोल में अपने जहाजों पर हमले का हवाला देते हुए शनिवार को समझौता निलंबित करने की घोषणा की थी. गुतारेस ने कहा था कि वह काला सागर खाद्यान्न् समझौते के संबंध में मौजूदा स्थिति के बारे में बहुत चिंतित हैं.

जुलाई में खाद्यान्न समझौते पर किया गया था हस्ताक्षर

बता दें कि इस के जुलाई महीने के दौरान इस्तांबुल में आयोजित एक समारोह के दौरान संयुक्त राष्ट्र मध्यस्थता वाली काला सागर खाद्यान्न समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे. इस समझौते के तहत तीन यूक्रेनी बंदरगाहों से अनाज परिवहन करने वाले जहाज दुनिया भर के बाजारों में एक सहमत गलियारे के साथ यात्रा करना था. इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहस तब गई, जब रूस ने काला सागर खाद्यान्न समझौता में भागीदारी को निलंबित करने के अपने फैसले के बाद बैठक का अनुरोध किया.

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गेहूं, मक्का, जौ और खाद का निर्यात करते हैं युक्रेन-रूस

सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने सुरक्षा परिषद को बताया कि यूक्रेन से अनाज और संबंधित खाद्य पदार्थों के निर्यात के ऐतिहासिक समझौते को जारी युद्ध और जीवन संकट की वैश्विक लागत के बीच जीवित रखा जाना चाहिए. यूक्रेन के अनाज निर्यात एक खाद्य सहायता अभियान नहीं हैं. वे दुनिया भर में सकारात्मक प्रभावों के साथ कीमत पर एक बड़े लीवर के रूप में काम करते हैं. संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक मार्टिन ग्रिफिथ्स ने कहा कि नए खाद्य सुरक्षा का आरोप महासचिव के लिए गंभीर चिंता का कारण हैं और कई सदस्य सरकार अब चिंतित हैं कि यह समझौता मुश्किल में है. संयुक्त राष्ट्र समाचार के अनुसार, यूक्रेन और रूस का दुनिया के निर्यात किए गए गेहूं और जौ का लगभग 30 फीसदी, मक्का का पांचवां हिस्सा और सूरजमुखी के तेल का आधा हिस्सा है. रूस उर्वरकों का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक भी है, जो वैश्विक निर्यात का 15 फीसदी हिस्सा है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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