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India Nepal Meeting: नेपाल को सख्त संदेश देगा भारत, विवादित नक्शा पास होने के बाद अगले हफ्ते पहली बार बैठक

Updated at : 12 Aug 2020 9:25 AM (IST)
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India Nepal Meeting: नेपाल को सख्त संदेश देगा भारत, विवादित नक्शा पास होने के बाद अगले हफ्ते पहली बार बैठक

India Nepal Meeting: नये नक्शे को लेकर रिश्तों में आई तल्खी के बीच भारत और नेपाल के अधिकारी आखिरकार बैठक करने वाले हैं. दोनों देशों के बीच यह बैठक वैसे तो चल रहे विकास और आर्थिक परियोजनाएं की समीक्षा को लेकर है लेकिन इसमें भारत की तरफ से नेपाल को कोई सख्त संदेश जरूर दिया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन दिनों नेपाल चीन के ज्यादा करीब आ रहा है, उसी को खुश करने के लिए नेपाल सरकार ने नक्शे तक में फेरबदल कर दिया और कालापानी के इलाके को अपना बताने लगा. भारत और नेपाल के बीच 9 महीने बाद पहली बार 17 अगस्त को काठमांडू में यह बातचीत होगी.

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India Nepal Meeting: नये नक्शे को लेकर रिश्तों में आई तल्खी के बीच भारत और नेपाल के अधिकारी आखिरकार बैठक करने वाले हैं. दोनों देशों के बीच यह बैठक वैसे तो चल रहे विकास और आर्थिक परियोजनाएं की समीक्षा को लेकर है लेकिन इसमें भारत की तरफ से नेपाल को कोई सख्त संदेश जरूर दिया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन दिनों नेपाल चीन के ज्यादा करीब आ रहा है, उसी को खुश करने के लिए नेपाल सरकार ने नक्शे तक में फेरबदल कर दिया और कालापानी के इलाके को अपना बताने लगा.

भारत और नेपाल के बीच 9 महीने बाद पहली बार 17 अगस्त को काठमांडू में यह बातचीत होगी. नेपाल की तरफ से विदेश मंत्रालय में सचिव शंकर दास बैरागी शामिल होंगे. भारतीय दल की अगुआई नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा करेंगे. भाषा के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि क्वात्रा और बैरागी के बीच समीक्षा प्रक्रिया के तहत होने वाली यह वार्ता भारत और नेपाल के दरम्यान होने वाले नियमित संवाद का हिस्सा है.

एक सूत्र ने बताया, दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय आर्थिक और विकासपरक परियोजनाओं की समीक्षा और समय-समय पर संवाद के लिये 2016 में समीक्षा प्रक्रिया की व्यवस्था की गई थी। इस बीच, नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा- दोनों देश सीमा विवाद के गुलाम बन कर नहीं रह सकते. हमें बातचीत करनी ही होगी. फिलहाल, सीमा विवाद पर बातचीत नहीं होगी. लेकिन, आज नहीं तो कल, उसे भी सुलझाना होगा.दोनों देश सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रहे हैं. वैसे नेपाल के विवादित नक्शा पास करने के बाद भी दोनों देशों के बीच रिश्ते पूरी तरह से खत्म नहीं हुए थे. हाल ही में भारत ने नेपाल को 10 वैंटिलेटर्स मेडिकल सहायता के रूप में दिए हैं. अब 17 अगस्त को दोनों देशों के बीच बैठक होगी.

Also Read: अयोध्या की तरह नेपाल में भी राम मंदिर बनाने का प्लान, पीएम ओली ने कह दी ये बात

कोरोना काल और नेपाल द्वारा नया नक्शा लाने के बाद पहली बार दोनों देशों के अधिकारी मिलेंगे. हालांकि यह भी बताया गया है कि दोनों देशों के बीच कभी भी बातचीत वैसे बंद नहीं हुई थी. यहां तक कि भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य भी विदेश मंत्रालय से बातचीत करते रहते थे. बता दें कि हाल के दिनों में सीमा विवाद और दूसरे मुद्दों की वजह से भारत और नेपाल के रिश्तों में खटास दिखी थी. अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन पर भी नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने बयानबाजी की थी. कोरोना को लेकर भी उन्होंने भारत पर आरोप लगाया था.

ठंडा पड़ा नेपाल का मिजाज?

चीन के इशारे पर भारत के साथ तनाव बढ़ाने में जुटे नेपाल का मिजाज ठंडा पड़ने लगा है. भारतीय इलाकों को अपने नक्शे में शामिल करके विवाद पैदा करने के बाद पड़ोसी देश अब दोबारा बातचीत करने के लिए रास्ते तलाश रहा है. केपी ओली की सरकार को खुद कोई रास्ता नहीं सूझा तो अब विशेषज्ञों से सलाह ले रही है कि किस तरह दोबारा भारत के साथ रिश्तों को सामान्य किया जाए ताकि बातचीत का सिलसिला बहाल हो. काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सप्ताह में विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने पूर्व मंत्रियों, कूटनीतिज्ञों और विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा की है. ज्ञवाली ने भी इस बात की पुष्टि की है कि भारत के साथ बातचीत के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

नेपाल ने ऐसे शुरू किया विवाद

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड के धारचुला को लिपुलेख दर्रे से जोड़ने वाली सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था. नेपाल ने इसका विरोध करते हुए दावा किया कि यह सड़क उसके क्षेत्र से होकर गुजरती है. इसके कुछ समय बाद नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को उसके क्षेत्र में दिखाया गया है. भारत इन इलाकों को अपना मानता है. जून में नेपाल की संसद ने देश के नए राजनीतिक मानचित्र को मंजूरी दे दी, जिसपर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया था.

Posted By: utpal kant

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