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चीन-पाक पर बरसे विदेश सचिव अरिंदम बागची, बोले- अफगानिस्तान पर इस्लामाबाद का रवैया सामने आया

पाकिस्तान को इसमें आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे सम्मेलन में शामिल नहीं हुए. उनका यह रवैया इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर इस्लामाबाद की गंभीरता को दर्शाता है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
भारत के विदेश सचिव अरिंदम बागची
भारत के विदेश सचिव अरिंदम बागची
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नयी दिल्ली: भारत के विदेश सचिव अरिंदम बागची ने पड़ोसी देशों और ओआईसी को जमकर खरी-खोटी सुनायी है. अफगानिस्तान पर नयी दिल्ली में संपन्न हुई अहम बैठक से इस्लामाबाद और चीन ने दूरी बनायी. यह बताता है कि अफगानिस्तान के मामले में ये लोग कितने गंभीर हैं. हालांकि, इस मुद्दे पर बागची ने चीन का नाम नहीं लिया.

विदेश सचिव श्री बागची ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान की सुरक्षा पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बैठक बुलायी थी. पाकिस्तान को इसमें आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे सम्मेलन में शामिल नहीं हुए. उनका यह रवैया इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर इस्लामाबाद की गंभीरता को दर्शाता है.

श्री बागची ने कहा कि पिछली बैठकों में हमने अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराने पर चर्चा की थी. सहमति बनी थी कि सहायता उपलब्ध कराने वालों को निर्बाध पहुंच की सुविधा दी जायेगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. सहायता करने वाली एजेंसियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह से मुश्किलों में घिरी अफगानिस्तान की जनता को उचित सहायता नहीं मिल रही है.

समस्या की गंभीरता को देखते हुए हम लगातार बैठकें कर रहे हैं. हम रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचायी जा सके. एनएसए स्तर की मीटिंग में अफगानिस्तान में उत्पन्न हुए मानवीय संकट पर गंभीर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश अफगानिस्तान को भारत सभी तरह का समर्थन देगा. यह बिल्कुल स्पष्ट है.

अरिंदम बागची ने कहा कि भारत सरकार वर्षों से अफगानिस्तान की आम जनता को अपनी मदद देता आया है. हाल के कुछ महीनों में वहां के जमीनी हालात बदतर हुए हैं. भारत चाहता है कि अफगानिस्तान के लोगों का जीवन सामान्य हो. उनके मानवाधिकारों की रक्षा हो और उन तक हर मानवीय सहायता पहुंचे.

भारत की सुरक्षा के लिए हर कदम उठायेंगे- चीन को दिया जवाब

अरुणाचल प्रदेश में भारत सरकार की ओर से किये जा रहे इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर सवाल उठाने वाले चीन को भी करारा जवाब दिया है. भारत के विदेश सचिव ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में अपने लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सरकार हर तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने के लिए कृतसंकल्पित है. उन्होंने कहा कि भारत अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने, अपने राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता के लिए सब कुछ करेगा.

उन्होंने कहा कि सीमा के आसपास चीन वर्षों से लगातार निर्माण कार्य कर रहा है. वह उन क्षेत्रों में भी इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है, जिसे उसने गैरकानूनी तरीके से हथिया रखा है. भारत लगातार चीन के इस दावे पर विरोध जताता रहा है. हमने अब तक उनके दावों को स्वीकार नहीं किया है.

विदेश सचिव ने कहा कि भारत सरकार ने हर मंच पर चीन की ऐसी गतिविधियों का मजबूती के साथ विरोध किया है. राजनयिक स्तर पर भी इसका विरोध किया जा रहा है और आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि सरकार सीमा के आसपास सड़कों एवं पुलों का निर्माण कर रही है. आम लोगों की सहूलियत के लिए हर तरह के निर्माण कार्य जारी रखेगी, ताकि उन्हें आवागमन करने में कोई दिक्कत नहीं हो.

जम्मू-कश्मीर हमारा आंतरिक मामला

अरिंदम बागची ने ओआईसी के दल की कश्मीर यात्रा पर भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि यह हमारा आंतरिक मामला है. मैंने पहले भी कहा था कि पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कोई तीसरा पक्ष हमें मंजूर नहीं है. यह हमारा आंतरिक मामला है और इसमें किसी और को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है.

1500 श्रद्धालुओं का जत्था जायेगा पाकिस्तान

अरिंदम बागची ने बताया कि इस बार 1500 श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान की यात्रा पर जायेगा. वर्ष 1974 में भारत-पाकिस्तान के बीच धर्मस्थलों की यात्रा के लिए बने प्रोटोकॉल के तहत ये श्रद्धालु 17 से 26 नवंबर के बीच पाकिस्तान जायेंगे. ये श्रद्धालु गुरुद्वारा दरबार साहिब, श्री पंजा साहिब, डेरा साहिब, ननकाना साहिब, करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सच्चा सौदा में जाकर मत्था टेकेंगे.

Posted By: Mithilesh Jha

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