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ICMR का दावा सिर्फ वैक्सीन नहीं कर सकता कोरोना संक्रमण से बचाव, कोरोना प्रोटोकाॅल है जरूरी

Updated at : 16 Jul 2021 4:50 PM (IST)
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ICMR का दावा सिर्फ वैक्सीन नहीं कर सकता कोरोना संक्रमण से बचाव, कोरोना प्रोटोकाॅल है जरूरी

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने ब्रेकथ्रू इंफेक्शन और रिइंफेक्शन पर एक अध्ययन किया है जिसमें यह पाया गया है कि कोविड वैक्सीन का एक या दो डोज लेने या फिर दोबारा कोरोना से संक्रमित होने के मामले असमान्य नहीं हैं, यानी कि ऐसा संभव है कि वैक्सीन लेने और एक बार कोरोना होने के बाद भी कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है.

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने ब्रेकथ्रू इंफेक्शन और रिइंफेक्शन पर एक अध्ययन किया है जिसमें यह पाया गया है कि कोविड वैक्सीन का एक या दो डोज लेने या फिर दोबारा कोरोना से संक्रमित होने के मामले असमान्य नहीं हैं, यानी कि ऐसा संभव है कि वैक्सीन लेने और एक बार कोरोना होने के बाद भी कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है.

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऐसे कई मामले सामने आये हैं जिसमें वैक्सीन लेने के बाद भी लोग कोरोना संक्रमित हुए और कई ऐसे केस भी आये जिसमें एक बार संक्रमित हो चुके मरीज भी दोबारा से कोरोना वायरस की चपेट में आ गये. जबकि एक बार संक्रमित होने के बाद प्राकृतिक रूप से 10-11 महीने के लिए एंटीबाॅडीज बन जाता है. आईसीएमआर ये पता लगाने में जुटी हुई है कि वैक्सीन का प्रभाव कितने दिनों तक रहेगा.

इस अध्ययन में ICMR ने 677 ऐसे लोगों को शामिल किया है जिन्होंने एक या दो डोज वैक्सीन का लिया था बावजूद इसके वे कोरोना संक्रमित हुए. अध्ययन में यह पाया गया कि जिन्हें भी ब्रेकथ्रू इंफेक्शन हुआ वे सभी डेल्टा या कप्पा वैरिएंट के शिकार हुए. इस अध्ययन की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं-

  • ब्रेकथ्रू या रिइंफेक्शन के शिकार 86 प्रतिशत लोग डेल्टा वैरिएंट के शिकार हुए.

  • अस्पताल में भरती होने की संभावना केवल 9.8 प्रतिशत रही.

  • केवल 0.4 प्रतिशत मामलों में मृत्यु हुई

  • वहीं रिइंफेक्शन के मामलों के लिए अल्फा वैरिएंट जिम्मेदार है.

  • डेल्टा और कप्पा वैरिएंट दक्षिणी, पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में संक्रमण का कारण बना.

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  • ब्रेकथ्रू इंफेक्शन में से 71% में लक्षण थे जबकि 29% संक्रमितों में लक्षण नहीं थे. लक्षणों में बुखार, उल्टी, खांसी एवं गले में खराश देखे गये. वहीं कई लोगों में गंध और स्वाद चले जाने की सूचना भी है. मात्र छह प्रतिशत मामलों में सांस फूलने की शिकायत दर्ज करायी गयी.

  • कोविड वैक्सीन लेने के बाद रोग की गंभीरता कम हो गयी है यह बात अध्ययन में साबित होती है.

  • अध्ययन में यह बात भी सामने आयी कि सिर्फ वैक्सीन से संक्रमण को नहीं रोका जा सकता है. मास्क लगाना और अन्य कोरोना प्रोटोकाॅल भी जरूरी हैं.

Posted By : Rajneesh Anand

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