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स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा : कोरोना काल में मजबूत हुई हैं ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं

देश में अगर कैंसर, डायबिटीज और हाइपरटेंशन का इलाज कोरोना के चलते बाधित होता, तो इन बीमारियों के ग्राफ में तेजी से बढ़ोतरी होती, जिस पर काबू पाना काफी मुश्किल होता.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
प्राथमिक उपचार केंद्रों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज.
प्राथमिक उपचार केंद्रों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज.
फोटो साभार : फोर्ब्स इंडिया डॉट कॉम

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दावा किया है कि कोरोना काल में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, कोरोना महामारी ने ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के मूल्यांकन करने का भी मौका दिया. वायरस संक्रमण के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में दूसरी एनसीडी बीमारियों की स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं बाधित नहीं हुईं. एक फरवरी 2020 से जून 2021 तक 75 प्रतिशत नॉन कम्युनिकेबल डिसीस (एनसीडी या गैर संचारित बीमारियां) की जांच की गई.

मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि देश में अगर कैंसर, डायबिटीज और हाइपरटेंशन का इलाज कोरोना के चलते बाधित होता, तो इन बीमारियों के ग्राफ में तेजी से बढ़ोतरी होती, जिस पर काबू पाना काफी मुश्किल होता. कोरोना के लगभग सभी संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए राज्यों के साथ मिलकर ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है. बावजूद इसके ग्रामीण क्षेत्र में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी है. प्रशासनिक स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता तब ही है, जब ग्रामीण क्षेत्र में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर सभी अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएं.

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में यदि भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को देखें, तो मार्च 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार 1,55,404 उप स्वास्थ्य केन्द्र, 24,918 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ग्रामीण क्षेत्र में हैं और केवल 5896 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शहरी क्षेत्र में. वर्ष 2018 में शुरू की गई सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस केन्द्र योजना के जरिए भी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बल मिला. इसके माध्यम से गांवों में लोगों की प्रीवेंटिव हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ी.

बयान में कहा गया है कि देश भर में इस समय संचालित 75,994 आयुष्मान भारत- हेल्थ एंड वेलनेस केन्द्रों की बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की गई है. जहां 30 साल से अधिक उम्र के युवाओं की सामुदायिक स्तर पर आशा वर्कर्स द्वारा स्वास्थ्य जांच (सीबीएसी) स्क्रीनिंग की जाती है. इससे ग्रामीण क्षेत्र में डायबिटिज, कैंसर, हाइपरटेंशन और सर्विकल कैंसर की प्रारंभिक स्तर पर ही जांच की जा सकती है.

मंत्रालय ने कहा है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहले जहां ग्रामीण क्षेत्र के लोग बड़े शहर की तरफ दौड़ते थे, अब सामुदायिक स्तर पर जांच सेवाओं का विस्तार किया गया. इन सेवाओं से महिलाओं को सबसे अधिक स्वास्थ्य लाभ हुआ, जिनकी अधिकांश बीमारियों की पहले शुरुआती स्तर पर जांच नहीं हो पाती थी.

बयान के अनुसार, एचडब्लूसी (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) के माध्यम से 50.29 करोड़ आबादी की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 54 फीसदी महिलाओं ने स्वास्थ्य की नियमित जांच कराई. सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों के कैडर को अब अधिकारी के रूप में जाना जाता है. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर के नेतृत्व में उप स्वास्थ्य केन्द्र और आशा वर्कर्स के काम की देखरेख की जाती है. इससे ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ी है. इन केन्द्रों की उपयोगिता को देखते हुए दिसंबर 2022 तक देशभर में इनकी संख्या 1.5 लाख तक करने की योजना है. निश्चित रूप से इसका फायदा यह होगा कि गंभीर बीमारियों की पहचान पहले चरण पर हो सकेगी.

कोरोना जांच और इलाज की गाइडलाइन

कोरोना संक्रमण पर निगरानी रखने के लिए सभी उप स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच के लिए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी किया गया. रैपिड एंटीजन जांच की अनिवार्यता के साथ ही सभी केन्द्रों पर प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ तैनात किया गया, जिससे किसी के भी इलाज में लापरवाही की आशंका न हो. रैपिड एंटीजन जांच की गंभीरता को देखते हुए मंत्रालय ने सभी राज्य और केन्द्र शासित राज्य के अधिकारियों को जांच से जुड़े मेडिकल स्टॉफ को पर्याप्त मेडिकल प्रशिक्षण देने का आदेश दिया. सैंपल कलेक्शन से लेकर जांच रिपोर्ट, सैंपल संरक्षित करने और डाटा प्रबंधन में आईपीसी प्रोटोकॉल (इंफेक्शन प्रीवेंशन प्रोटोकॉल) का पालन करना सुनिश्चित किया गया.

गांवों में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी

वैसे तो गांव हो या शहर सभी स्तर जगह कोरोना से बचाव का एक ही मंत्र काम करता है, वह वैक्सीनेशन है और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन शहर की तरह ही गांव को भी संक्रमण के जोखिम से बचा सकता है. यहां लोगों को समूह के बीच चर्चा करना, एक दूसरे के घर जाना, गले मिलना और साथ खेलने, खाने का ट्रेंड अधिक देखा जाता है. कुछ दिनों के लिए इस तरह के सामूहिक जमावड़े को नजरअंदाज करना है. दूर से ही अभिनंदन किया जाए और गले मिलने की जगह नमस्ते से काम चलाएं. सामाजिक दूरी का पालन करें और नियमित रूप से हाथ धोते रहें.

एक नजर इधर भी

  • उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर 14 और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 63 प्रमुख जांच सुविधाएं मुहैया कराई गईं.

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 105 और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 172 जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई गईं.

  • टेली -कंसलटेंसी की जरूरत को देखते हुए ई-संजीवनी टेली कंसलटेंसी सेवा शुरू की गई, जिसके जरिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर 26.42 लाख लोगों ने सेवा ली.

  • कोविड टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए पंचायत घर के पास टीकाकरण की सुविधा दी गई. इसके साथ ही बुजुर्गों की सुविधा को देखते हुए घर के पास ही स्कूल, सामुदायिक केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर टीकाकरण सेंटर बनाए गए.

Posted by : Vishwat Sen

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Published Date

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