दिल दहला देगी तमिलनाडु के इस गांव की घटना, दलितों से नफरत के कारण पानी में मिला दिया मल

Published by : Pritish Sahay Updated At : 29 Dec 2022 12:07 PM

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तमिलनाडु के इरापुर गांव में दलित लोग सदियों से छुआछूत का दंश झेल रहे हैं. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उनके साथ हर जगह भेदभाव किया जाता है. उन्हें गांव के मंदिर में भी जाने की इजाजत नहीं है. यहां तक की गांव की चाय में भी दलितों के लिए अलग तरह की गिलास है.

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पूरा देश आजादी का अमृत उत्सव मना रहा है लेकिन स्वतंत्रता के 75 सालों बाद भी देश छुआछूत और भेदभाव की छोटी सोच से पूरी तरह आजाद नहीं हो पाया है. ताजा मामला तमिलनाडु के एक गांव इरायुर का है. जहां दलित समुदाय के लिए बनी पानी की टंकी में मानव मल डालकर पूरे टंकी के पानी को दूषित कर दिया गया. सबसे बड़ी बात की इस दूषित पानी को पीने के बाद कई बच्चे बीमार हो गये.

दूषित जल पीने से कई बच्चे हुए बीमार: इरापुर गांव में लोगों ने बताया कि टंकी में मल डाले जाने की जानकारी उस समय मिली जब अचानक से गांव के कई बच्चे बीमार पड़ने लगे. जब उन्हें डॉक्टर के पास ले जाया गया तो उन्होंने बीमारी की वजह दूषित पानी को बताया. जिसके बाद गांव के कुछ युवक ने पानी की टंकी के अंदर झांककर देखा तो वहां का मंजर खौफजदा करने वाला दिखा. पानी टंकी के अंदर भारी मात्रा में मानव मल डाला हुआ था.

टंकी के पानी में मिला था मानव मल: गांव के लोगों के मुताबिक, पानी की टंकी के अंदर बड़ी मात्रा में मानव मल डाला हुआ था, जिसके कारण पूरा पानी पीला हो गया था. गांव के लोग इस बात से अनजान बीते एक सप्ताह से इसी पानी को पी रहे थे. लेकिन जब बच्चे बीमार हुए और डॉक्टरों ने इसका कारण दूषित पानी को बताया तब कही जाकर सत्ताई सामने आयी. वहीं, अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि इस घटना के पीछे किसका हाथ है. घटना के बाद पुडुकोट्टई कलेक्टर ने भी गांव का दौरा किया था.

घटना के पीछे कौन है जिम्मेदार: पुडुकोट्टई कलेक्टर कविता रामू और जिला पुलिस प्रमुख वंदिता पांडे ने अपने दौरे में गांव के लोगों से घटना के बारे में पूछा तो लोगों ने बताया कि उन्होंने किसी को पानी की टंकी में चढ़ते नहीं देखा. लोगों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से टंकी के चारों ओर की बाड़ खोल दी गई थी. वहीं, इस घटना के पीछे किन लोगों का हाथ है इसका अभी पता नहीं चल पाया है.

सदियों से जारी है छुआछूत: गौरतलब है कि इस गांव के दलित लोग सदियों से छुआछूत का दंश झेल रहे हैं. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उनके साथ हर जगह भेदभाव किया जाता है. उन्हें गांव के मंदिर में भी जाने की इजाजत नहीं है. यहां तक की गांव की चाय में भी दलितों के लिए अलग तरह की गिलास है. उसी में उन्हें चाय दी जाती है. जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने चाय दुकान के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इसके अलावा दलितों से कहा गया है कि वो उन लोगों की पहचान करें जिन्होंने उन्हें मंदिर में प्रवेश से रोका है. 

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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