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पुणे एयरपोर्ट से 'कोविशील्ड' की पहली खेप लेकर स्पाइस जेट का विमान दिल्ली रवाना, 4.5 करोड़ वैक्सीन की शुरू हुई आपूर्ति

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
'कोविशील्ड' वैक्सीन की पहली खेप दिल्ली रवाना की गयी
'कोविशील्ड' वैक्सीन की पहली खेप दिल्ली रवाना की गयी
ANI

पुणे : देश भर में 16 जनवरी से शुरू होनेवाले वैक्सीनेशन को लेकर 'कोविशील्ड' वैक्सीन की पहली खेप मंगलवार की सुबह पांच बजे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से पुणे हवाई अड्डे के लिए रवाना किया गया. यहां पहुंचने पर पहली फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना की गयी. स्पाइसजेट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने बताया कि स्पाइसजेट ने आज भारत कोविद वैक्सीन की पहली खेप रवाना की. 'कोविशिल्ड' की पहली खेप दिल्ली ले जाया गया. इसमें 34 पेटियां थीं और वजन 1088 किलोग्राम था.

पुणे एयरपोर्ट से वैक्सीन का हवाई परिवहन संभालने वाली कंपनी एसबी लॉजिस्टिक के एमडी संदीप भोसले ने बताया कि कुल आठ हवाईजहाजों से 'कोविशिल्ड' वैक्सीन को पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 13 विभिन्न स्थानों पर ले जायी जायेगी. इससे पहले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से तीन तापमान नियंत्रित ट्रकों में भर कर 'कोविशील्ड' वैक्सीन रवाना किया गया था.

परिवहन व्यवस्था में शामिल स्रोत के मुताबिक, तापमान नियंत्रित ट्रकों में 478 बक्सों में वैक्सीन भर कर भेजा गया है. इन बक्सों का वजन करीब 32 किलो है. इन्हें पुणे हवाई अड्डा ले जाया जा रहा है. वहां से देश के विभिन्न राज्यों में वैक्सीन भेजी जायेगी.

इससे पहले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से ट्रकों को रवाना किये जाने से वाहनों की पूजा भी की गयी. मालूम हो कि सरकार ने अप्रैल माह तक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से 4.5 करोड़ से अधिक की खुराक की आपूर्ति करने का ऑर्डर दिया है. इसके लिए प्रति डोज 200 रुपये का भुगतान किया जायेगा. 200 रुपये की कीमत में जीएसटी शामिल नहीं है, इसमें उसे भी अलग से जोड़ा जायेगा.

भारत में अगले कुछ महीनों में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने की योजना है. वैक्सीनेशन कार्यक्रम में सबसे महत्वपूर्ण है, उनलोगों की पहचान करना, जिन्हें वैक्सीनेशन की सबसे ज्यादा जरूरत है. इसके लिए सरकार ने को-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है. आधार की मदद से लाभार्थियों की पहचान की जायेगी और समय पर दूसरी खुराक दी जायेगी.

सरकार ने पहले चरण में तीन करोड़ लोगों को वैक्सीन देना तय किया है. इनमें देश के अलग-अलग राजयों के हेल्थवर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल होंगे. इसके बाद दूसरे-तीसरे चरण में 50 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से नीचे के वैसे बीमार लोग, जिन्हें संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है, वैक्सीन उपलब्ध कराया जायेगा.

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