Explainer: कौन बनेगा कांग्रेस का अगला अध्यक्ष, शशि थरूर पर क्यों भारी पड़ रहे मल्लिकार्जुन खड़गे

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 01 Oct 2022 9:03 PM

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कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान कुल 20 फॉर्म मिले थे, जिसमें चार को खारिज कर दिया गया. खारिज होने के पीछे उन्होंने हस्ताक्षर में गड़बड़ी को कारण बताया. खड़गे ने 14 फॉर्म भरे थे, जबकि थरूर ने पांच और त्रिपाठी ने एक फॉर्म भरा था.

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कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव काफी दिलचस्प होता जा रहा है. अशोक गहलोत और दिग्विजय सिंह के नाम पर सबसे अधिक चर्चा हुई थी, लेकिन दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया है. जबकि झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता के एन त्रिपाठी का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद अब मैदान में केवल शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे रह गये हैं. जिससे मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है.

अध्यक्ष पद के नामांकन में आये 20 फॉर्म, चार रद्द

कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान कुल 20 फॉर्म मिले थे, जिसमें चार को खारिज कर दिया गया. खारिज होने के पीछे उन्होंने हस्ताक्षर में गड़बड़ी को कारण बताया. खड़गे ने 14 फॉर्म भरे थे, जबकि थरूर ने पांच और त्रिपाठी ने एक फॉर्म भरा था. जिसमें त्रिपाठी का नामांकन खारिज हो गया.

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थरूर पर खड़गे भारी

कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच सीधा मुकाबला होगा. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि शशि थरूर पर खड़गे भारी पड़ेंगे. मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के सबसे विश्वसनीय और कद्दावर नेता माने जाते हैं. पार्टी के अंदर और राजनीति में उनकी पहचान स्वच्छ नेताओं में होती है. कांग्रेस ने उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी, उस वह पूरी इमानदारी के साथ पूरा किया. चाहे बात 2014 के लोकसभा चुनाव की हो या फिर संसद में विपक्ष के नेता की. हमेशा पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरे. हाल के दिनों में राजस्थान कांग्रेस में जिस तरह से बवाल हुआ था, उसे भी शांत कराने के लिए अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें ही पर्यवेक्षक बनाकर वहां भेजा था. यही नहीं खड़गे कांग्रेस परिवार के बेहद करीबी रहे हैं.

खड़गे की पहचान दलित नेता के रूप में

मल्लिकार्जुन खड़गे की पहचान दलित नेता के रूप में भी है. दक्षिण भारत से होने के बाद भी खड़गे हिंदी के अच्छे जानकार हैं. जब संसद में भाषण देते हैं, तो अन्य दल के नेता भी उन्हें गहराई के साथ सुनते हैं. खड़गे अपने निजी जीवन में बेहद शांत और सरल माने जाते हैं, लेकिन संसद में सत्ता पक्ष को अपने तर्क से परास्त करने में पीछे कभी नहीं रहे. खड़गे 9 बार विधायक रहे और दो बार लोकसभा सांसद भी रहे.

खेल के मैदान से भी खड़गे का रहा लगाव

मल्लिकार्जुन खड़गे के बारे में शायद लोगों को यह मालूम न हो कि राजनीति की पिच पर खेलने के साथ-साथ वह खेल के मैदान पर भी शानदार खिलाड़ी रहे हैं. खड़गे को खेल में काफी दिलचस्पी रही है.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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