डीएमके का राहुल गांधी पर वार- उनकी राजनीतिक नासमझी और बेईमानी से क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसान हुआ
एमके स्टालिन के साथ राहुल गांधी
DMK attacks Rahul Gandhi : डीएमके ने अपने पुराने सहयोगी राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है. डीएमके की ओर से एक्स पर लिखा गया है कि वे कोई चमकदार खिलौना देखकर पुराने साथियों को छोड़ देते हैं. डीएमके ने उनकी राजनीतिक समझ पर भी सवाल उठाया है और उन्हें बेईमान कहा है, जिसके बाद कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि डीएमके को यह नहीं भूलना चाहिए कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय वे बीजेपी के साथ खड़े थे.
DMK attacks Rahul Gandhi : डीएमके ने मंगलवार को राहुल गांधी पर यह आरोप लगाया कि उनकी नीतियों की वजह से इंडिया गठबंधन कमजोर हुआ है. डीएमके के मुखपत्र मुरासोली में यह कहा गया है कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव के दौरान क्षेत्रीय पार्टियों से सहयोग और समर्थन मांगते हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान वे क्षेत्रीय पार्टियों को कमजोर करने का काम करते हैं.
विजय के साथ गठबंधन की वजह से साधा निशाना
तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव कांग्रेस ने डीएमके के साथ लड़ा था. चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पार्टी जोसेफ विजय के टीवीके(तमिलगा वेत्री कजगम) के साथ हो गई. डीएमके इस गठबंधन की लगातार निंदा कर रहा है. मुरासोली में यह लिखा गया है कि एक के बाद एक राज्य में जहां असेंबली इलेक्शन होते हैं, कांग्रेस ने इंडिया ब्लॉक पार्टनर्स को पावर में आने से रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश की है. बावजूद इसके जब लोकसभा चुनाव आते हैं तो वह क्षेत्रीय पार्टियों से सहयोग मांगती है. डीएमके का कहना है कि कांग्रेस के धोखे की वजह से डीएमके ने 8 जून को नई दिल्ली में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग में शामिल नहीं होने का फैसला लिया. डीएमके ने आरोप लगाया कि इंडिया ब्लाॅक की इस मीटिंग में कई नेताओं ने कांग्रेस की इस नीति की निंदा की और राहुल गांधी को निशाने पर लिया.
इंडिया गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी की हुई निंदा
डीएमके के मुखपत्र में यह कहा गया है कि विपक्षी पार्टियों की बैठक में राहुल गांधी की जिस तरह से आलोचना हुई, उसकी उम्मीद शायद उन्हें नहीं थी. बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की एकता पर चर्चा के लिए बुलाई गई मीटिंग में कांग्रेस खुद आलोचना का शिकार बन गई. इसके लिए राहुल गांधी की राजनीतिक नासमझी और बेईमानी ही जिम्मेदार है.
राहुल गांधी की बातों को अब तमिलनाडु स्वीकार नहीं करेगा
डीएमके के नेता टीकेएस एलंगोवन ने एएनआई के साथ बातचीत में कहा कि चुनाव के बाद जिस तरह वे डीएमके के साथ छोड़कर टीवीके के साथ हो गए, अब तमिलनाडु की जनता राहुल गांधी को स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने अपने फायदे के लिए नैतिकता को किनारे कर दिया, जिसकी वजह से उनके दो विधायकों को मंत्री पद मिल गया.
बीजेपी के साथ खड़ी रही है डीएमके : संदीप दीक्षित
राहुल गांधी पर डीएमके के तीखे हमले के बाद कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित ने एएनआई न्यूज एजेंसी से कहा कि डीएमके को यह भी याद रखना चाहिए कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय में वे बीजेपी के साथ खड़े थे. ऐसा नहीं है कि वे सिर्फ सेक्युलर ताकतों के साथ थे. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कभी भी एक तरह का गठबंधन नहीं रहा है. अगर किसी राज्य में कोई दूसरी पार्टी उभरती है और सेक्युलर है, तो उन्हें बड़े लक्ष्य के लिए साथ लाना चाहिए. डीएमके के साथ कांग्रेस कई बार रही है और कई बार विरोध में भी रही है. इन्हें सोच बड़ी करने की जरूरत है.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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