Balasore Accident के दोषियों पर IPC की इन धाराओं के तहत चलेगा मुकदमा, जानिए क्या हैं इनमें सजा के प्रावधान
Published by : Rajeev Kumar Updated At : 07 Jun 2023 4:19 PM
Balasore Train Accident - सीबीआई ने आईपीसी (IPC) और रेलवे अधिनियम (Railway Act) की विभिन्न धाराओं के तहत एक एफआईआर दर्ज की है. आईपीसी की धारा 337, 338, 304A, 34 और रेलवे अधिनियम की धारा 153, 154, 175 तहत केस दर्ज किया है. जानिए क्या है Railway Act की धारा 153, 154 और 175?
Coromandel Train Accident: ओडिशा (Odisha) के बालासोर रेल हादसे (Balasore Train Accident) की सबसे बड़ी वजह अब तक ‘सिग्नल में गड़बड़ी’ को माना जा रहा है. रेलवे बोर्ड (Railway Board) की सदस्य जया वर्मा सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया है. हादसे के बाद रेलवे बोर्ड की सिफारिश पर सीबीआई ने कोरोमंडल रेल दुर्घटना मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है.
IPC की धारा 337, 338, 304A, 34 तहत केस दर्ज
सीबीआई ने रेल मंत्रालय की सिफारिश और ओडिशा सरकार (Odisha Government) की सहमति व डीओपीटी (Department of Personnel and Training (DoPT) Government of India) के प्राप्त आदेशों पर मामला दर्ज किया है. सीबीआई ने आईपीसी (IPC) और रेलवे अधिनियम (Railway Act) की विभिन्न धाराओं के तहत एक एफआईआर दर्ज की है. आईपीसी की धारा 337, 338, 304A, 34 और रेलवे अधिनियम की धारा 153, 154, 175 तहत केस दर्ज किया है. हादसे की जांच के सिलसिले में सीबीआई और फॉरेंसिंक टीम ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों से पूछताछ की.
Also Read: Electronic Interlocking: रेलवे में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग क्या होता है, जो बना बालासोर रेल हादसे की वजहआईपीसी की धारा 337 क्या है?
भारतीय दंड संहिता की धारा 337 के अनुसार, जो भी कोई किसी व्यक्ति को उतावलेपन या उपेक्षा पूर्वक ऐसे किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो, चोट पहुंचती हो, तो उसे छह महीने तक कारावास या पांच सौ रुपये तक आर्थिक दंड, या दोनों से दंडित किया जाएगा.
आईपीसी की धारा 338 क्या है?
भारतीय दंड संहिता की धारा 338 के अनुसार, जो भी कोई किसी व्यक्ति को उतावलेपन या उपेक्षापूर्वक ऐसे किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो, गंभीर चोट पहुंचती हो, तो उसे दो वर्ष तक कारावास या एक हजार रुपये तक का आर्थिक दंड, या दोनों से दंडित किया जाएगा.
आईपीसी की धारा 304A क्या है?
भारतीय दंड संहिता की धारा 304A के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी उतावलेपन से या उपेक्षापूर्वक करके कोई ऐसा काम करता है जिससे दूसरे व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और वह आपराधिक मानव वध की कोटि में न आता हो, तो उसे 2 वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों का दंड दिया जाएगा.
आईपीसी की धारा 34 क्या है?
भारतीय दंड संहिता की धारा 34 सामूहिक रूप से किये गए अपराध और अपराध को अंजाम देने वालों से संबंधित है. जब कई लोग समान इरादे से कोई आपराधिक कृत्य करते हैं, तो सेक्शन 34 के अनुसार उनमें से प्रत्येक इस कृत्य के लिए उसी तरह जवाबदेह होगा. धारा 34 में किसी भी तरह के अपराध की सजा का प्रावधान नहीं दिया गया है, इस धारा में केवल समान इरादे के अपराध के बारे में बताया गया है.
रेलवे अधिनियम की धारा 153 क्या है?

रेलवे अधिनियम की धारा 154 क्या है?

रेलवे अधिनियम की धारा 175 क्या है?

सीबीआई, रेलवे सुरक्षा आयुक्त और जीआरपी भी कर रही जांच
सीबीआई अधिकारियों की एक टीम फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ ओडिशा के बालासोर जिले में पहुंच कर जांच में जुट गई है. सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने पटरियों और सिग्नल रूम का निरीक्षण किया और बाहानगा बाजार रेलवे स्टेशन पर तैनात रेल अधिकारियों से पूछताछ की. सीबीआई अधिकारियों के साथ आयी फॉरेंसिक टीम ने भी सिग्नल रूप के कर्मचारियों से बात की और विभिन्न उपकरणों के उपयोग एवं उनके काम करने के तरीकों की जानकारी प्राप्त की. सीबीआई हादसे की आपराधिक कोण से जांच करेगी, क्योंकि रेलवे ने हादसे के पीछे तोड़फोड या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका जतायी है. रेलवे सुरक्षा आयुक्त और जीआरपी भी जांच कर रही है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










