'भाजपा का नारा बेटी डराओ-बृजभूषण बचाओ', पहलवानों के मामले को लेकर कांग्रेस का वार

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कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि खेल मंत्री को कैसे पता चला कि 15 तारीख तक आरोपपत्र दायर हो जाएगा? आरोप पत्र दिल्ली पुलिस ने तैयार किया या भाजपा कार्यालय में इसे तैयार किया गया. एक नाबालिग लड़की बृजभूषण शरण सिंह जैसे बड़े आदमी के खिलाफ पॉक्सो के तहत शिकायत दर्ज करती है.

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नई दिल्ली : कांग्रेस ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के वर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एक नाबालिग पहलवान की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले को रद्द करने के दिल्ली पुलिस के अनुरोध के बाद गुरुवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी का नया नारा ‘बेटी डराओ-बृजभूषण बचाओ’ है.

पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि पॉक्सो के तहत मामले की शिकायत पर आरोपी को तुरंत हिरासत में लिया जाता है, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह मीडिया में इंटरव्यू देकर मेडल को 15 रुपये का बताता है और रैलियों में शक्ति प्रदर्शन करता है. उससे दिल्ली पुलिस 45 दिन तक पूछताछ तक नहीं करती और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्राथमिक दर्ज होती है.

भाजपा को आरोपपत्र दर्ज करने की तारीख का पता कैसे चला

कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि खेल मंत्री को कैसे पता चला कि 15 तारीख तक आरोपपत्र दायर हो जाएगा? आरोप पत्र दिल्ली पुलिस ने तैयार किया या भाजपा कार्यालय में इसे तैयार किया गया. उन्होंने दावा किया कि एक नाबालिग लड़की बृजभूषण शरण सिंह जैसे बड़े आदमी के खिलाफ पॉक्सो के तहत शिकायत दर्ज करती है और यौन शोषण का आरोप लगाती है.

सरकार से सांसद तक लड़की के खिलाफ

इसके बाद सारा तंत्र, पुलिस, सरकार के मंत्री और सांसद मिलकर उस लड़की के खिलाफ खड़े हो जाते हैं और बृजभूषण शरण सिंह को संरक्षण दिया जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि आज भारतीय जनता पार्टी का नारा है- ‘बेटी डराओ-बृजभूषण बचाओ.’

Also Read: बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दायर की 1000 पन्नों की चार्जशीट, पॉक्सो एक्ट में मिली क्लीन चिट

पुलिस ने अदालत में दाखिल की अंतरिम रिपोर्ट

दिल्ली पुलिस ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निर्वतमान प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एक नाबालिग पहलवान की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले को रद्द करने का मंगलवार को अनुरोध करते हुए अदालत के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल की. पुलिस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोपों के कोई पुष्ट सबूत नहीं मिले हैं. अदालत ने मामले को चार जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.

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