सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्य सरकारें चाहें तो छात्र आंदोलन से जुड़े केस बंद कर सकती हैं

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सुप्रीम कोर्ट, फोटो- एएनआई

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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा है कि छात्र आंदोलन से जुड़े केस राज्य सरकारें बंद करती हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में राज्य सरकारें चाहें तो कानून के अनुसार छात्रों के खिलाफ दर्ज केस बंद कर सकती हैं या उन्हें वापस ले सकती हैं. बशर्ते उनका गंभीर और जघन्य अपराधों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हो.

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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक रिकॉर्ड से आशय सिर्फ गंभीर और जघन्य अपराधों से है.


आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को नहीं मिलेगी राहत

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने के अपने आश्वासन को लेकर वह प्रतिबद्ध है. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा.

2,700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं ली जाएंगी

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पिछले महीने अपना विरोध प्रदर्शन उस आश्वासन के बाद खत्म किया था, जिसमें कहा गया था कि परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर राजधानी में जुटे हजारों प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं ली जाएंगी. सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के बच्चों को भी पीटा गया.

उन्होंने कहा, वीडियो बेहद चौंकाने वाले हैं. हमने अदालत को 300 वीडियो सौंपे हैं. चूंकि ऊपर से निर्देश आए हैं, इसलिए पुलिस आयुक्त को इन सब पर ध्यान देना चाहिए. शंकरनारायणन ने कहा, हमने बिना वर्दी वाले उन लोगों की पहचान की है, जो कथित पुलिस ज्यादती में शामिल थे. पुलिस आयुक्त और आरएएफ (त्वरित कार्य बल) निदेशक को यह बताने का निर्देश दिया जाना चाहिए कि पुलिस ने पैलेट गन आदि का इस्तेमाल क्यों किया. मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी.

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