‘जो गांधी के हत्यारे हैं, उन्हें हमें एंटी नेशनल कहने का कोई अधिकार नहीं,’ अभिजीत दीपके का RSS पर हमला

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अभिजीत दीपके

अभिजीत दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने नाथूराम गोडसे को देश का पहला एंटी-नेशनल बताते हुए RSS और मोदी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने आरक्षण का समर्थन करते हुए सरकार से शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ाने की मांग की है.

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कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने कहा है कि देश में अगर कोई पहला एंटी नेशनल था तो वो नाथूराम गोडसे था. उसकी विचारधारा के समर्थक हमें एंटी नेशनल कह रहे हैं.

मुझे लगता है कि उनके पास को मोरल राइट नहीं है कि वो हमें एंटी नेशनल कहें. एनएनआई न्यूज एजेंसी के साथ लंबी बातचीत में अभिजीत दीपके ने मोदी सरकार और आरएसएस पर हमला किया है.


दीपके ने झारखंड में हो रहे आंदोलन को समर्थन देने की बात कही

अभिजीत दीपके लगातार यह कहते आए हैं कि उनकी राजनीति में कोई रुचि नहीं है और वे सिर्फ छात्रों के मुद्दों को उठा रहे हैं. लेकिन झारखंड में जेपीएसी और जेएसएससी परीक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों के पक्ष में उनका कोई स्टेटमेंट नहीं आया था. जब इस बारे में उनसे पूछा गया, तो दीपके ने कहा कि हम झारखंड के युवाओं के साथ हैं. मेरी कल रात को उनसे बातचीत हुई है. हम उनके मांगों के साथ हैं,जैसे ही मेरी तबीयत ठीक होगी मैं वहां जाकर उनके आंदोलन का हिस्सा बनूंगा.

आरक्षण को समर्थन देने की कही बात

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के बाद आरक्षण को समाप्त करने की बात भी उठ रही है. ऐसे में जब दीपके से आरक्षण के बारे में पूछा गया, तो वे इसके समर्थन में बोले. दीपके ने कहा कि शिक्षा देने में क्या दिक्कत है. यह सरकार का दायित्व है कि वो अधिक से अधिक लोगों तक शिक्षा पहुंचाए. इसके लिए अगर आरक्षण दिया जाता है, तो इसमें गलत क्या है. जहां तक बात सीट की है, तो सरकार सीट बढ़ाए. सरकार स्कूल काॅलेज बढ़ाएं, इसके लिए आरक्षण खत्म करने की क्या जरूरत है.

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाने पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था, जो मिल गया है. हमारी मांग पूरी हुई है, लेकिन जिन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया है वो बलात्कारियों का स्वागत करने वाले व्यक्ति हैं. प्रह्लाद जोशी पर बिलकिस बानो के रेपिस्टों का स्वागत करने का आरोप लगा है. ऐसे में स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा कि शिक्षा मंत्री कौन है-बलात्कारियों का स्वागत करने वाला.


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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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