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Cabinet: भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट रेलवे लाइन के दोहरीकरण को कैबिनेट की मंजूरी

Updated at : 10 Sep 2025 6:29 PM (IST)
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Union Minister Ashwini Vaishnaw

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पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ावा देना है. 3,169 करोड़ रुपये की लागत से 177 किलोमीटर लंबे रेलखंड के विस्तार से न केवल रेल सेवाएं बेहतर होंगी बल्कि कोयला, सीमेंट, उर्वरक, ईंट और पत्थर जैसी वस्तुओं की ढुलाई भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी.

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Cabinet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट सिंगल रेलवे लाइन खंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी. 177 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड पर दोहरीकरण परियोजना की कुल लागत 3,169 करोड़ रुपये तय की गई है.

इससे माल और यात्री दोनों तरह के यातायात में सुगमता सुनिश्चित होगी. यह निर्णय भारतीय रेलवे को अधिक कुशल और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ावा देना है. इससे न केवल रेल सेवाएं बेहतर होंगी बल्कि कोयला, सीमेंट, उर्वरक, ईंट और पत्थर जैसी वस्तुओं की ढुलाई भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी. अनुमान है कि इस दोहरीकरण से हर साल 15 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी.

तीन राज्यों के लगभग 29 लाख आबादी को मिलेगा लाभ

यह परियोजना बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के पांच जिलों को जोड़ेगी, जिससे लगभग 441 गांवों,  28.72 लाख आबादी तथा तीन आकांक्षी जिलों (बांका, गोड्डा और दुमका) तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी. यह रेलमार्ग देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और बंगाल स्थित तारापीठ(शक्ति पीठ) जैसे धार्मिक स्थलों को भी बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगा, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. 

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

यह परियोजना न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी बल्कि क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और व्यापार को भी गति देगी. यह परियोजना “नये भारत” के आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है. जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएगा और उनके रोजगार या स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ायेगा.

पांच करोड़ लीटर तेल की बचत

विशेषज्ञों के मुताबिक रेलवे एक पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन साधन होने के नाते देश को अपने जलवायु लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद करेगा. परियोजना से लगभग 5 करोड़ लीटर तेल की बचत और 24 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आयेगी. यह कमी एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगी. कुल मिलाकर, इस परियोजना को क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

फैसले की जानकारी देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस परियोजना की मंजूरी दी गयी. 177 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड पर दोहरीकरण परियोजना की कुल लागत 3,169 करोड़ रुपये तय की गई है. इस परियोजना से रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, संचालन आसान होगा और भीड़भाड़ में कमी आयेगी. इससे माल और यात्री दोनों तरह के यातायात में सुगमता सुनिश्चित होगी.

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Anjani Kumar Singh

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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