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Assam Assembly Election 2021 : डीब्रूगढ़ में पहले फेज के चुनाव के लिए तैयारियां पूरी, पोलिंग केंद्रों में लोगों के लिए सैनिटाइजेशन की सुविधा भी उपलब्ध

Updated at : 25 Mar 2021 9:06 PM (IST)
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Assam Assembly Election 2021 : डीब्रूगढ़ में पहले फेज के चुनाव के लिए तैयारियां पूरी, पोलिंग केंद्रों में लोगों के लिए सैनिटाइजेशन की सुविधा भी उपलब्ध

Assam Assembly Election 2021 Latest News Updates असम के डीब्रूगढ़ में शनिवार को होने वाले पहले फेज के चुनाव के लिए प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली है. डीब्रूगढ़ के जिलाधिकारी (DM) पल्लव गोपाल झा ने बताया कि हमारे 1,514 पोलिंग केंद्र हैं. यहां मतदान के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी है. उन्होंने बताया कि पोलिंग केंद्रों में लोगों के लिए सैनिटाइजेशन की भी सुविधा उपलब्ध है.

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Assam Assembly Election 2021 Latest News Updates असम के डीब्रूगढ़ में शनिवार को होने वाले पहले फेज के चुनाव के लिए प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली है. डीब्रूगढ़ के जिलाधिकारी (DM) पल्लव गोपाल झा ने बताया कि हमारे 1,514 पोलिंग केंद्र हैं. यहां मतदान के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी है. उन्होंने बताया कि पोलिंग केंद्रों में लोगों के लिए सैनिटाइजेशन की भी सुविधा उपलब्ध है.

बता दें कि असम विधानसभा चुनाव में पहले चरण की 47 सीटों पर कुल 267 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं. पहले दौर में जिन 47 सीटों पर शनिवार को मतदान होना है. उसमें से 42 सीटें ऊपरी असम के 11 जिलों की हैं, जबकि पांच सीटें सेंट्रल असम में इलाके की शामिल हैं. इनमें सीटों पर हिंदू असमिया मतदाताओं के साथ-साथ चाय बगानों में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं की भी निर्णायक भूमिका है. असमिया मतदाता सीएए के लागू करने के खिलाफ हैं जबकि चाय बागानों में काम करने वाले अदिवासी समुदायों के लिए दिहाड़ी मजदूरी एक अहम मुद्दा है.

असम के पहले चरण की जिन सीटों पर वोटिंग होनी है, वहां पर पिछले चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने कांग्रेस का सफाया कर दिया था. 2016 के विधानसभा चुनाव में 47 सीटों में से बीजेपी ने 27 और उसकी सहयोगी असम गणपरिषद ने 8 सीटों पर कब्जा जमाया था. वहीं, कांग्रेस ने 9 सीटें जीती थीं और एआईयूडीएफ ने दो, जबकि एक सीट अन्य को मिली थी.

इस बार असम में विपक्ष एकजुट होकर चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहा है. कांग्रेस, लेफ्ट और एआईयूडीएफ एक साथ मिलाकर चुनाव चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि बीजेपी के एजेपी के साथ चुनाव में उतरी है. सीएए के खिलाफ पहले चरण में सबसे ज्यादा आक्रोश है तो चाय मजदूरों की दिहाड़ी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना गया है. बीजेपी के सामने अपने पुराने नतीजे दोहराने की चुनौती है तो कांग्रेस गठबंधन को सत्ताविरोधी लहर में अपना राजनीतिक फायदा नजर आ रहा है.

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