Asaduddin Owaisi ने कहा-व्हाटसएप यूनिवर्सिटी से बनाई गई है हिंदुओं की संख्या घटने की रिपोर्ट, जानें क्या है मामला

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Asaduddin Owaisi

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पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें यह बताया गया है कि 1950 से 2015 के बीच देश में हिंदुओं की आबादी 7.8 प्रतिशत घटी है और मुसलमानों की आबादी 43.15 प्रतिशत बढ़ी है.

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Asaduddin Owaisi : AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की रिपोर्ट को व्हाट्‌सएप यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट करार दिया. उन्होंने कहा कि पहल मुझे रिपोर्ट दीजिए, यह कौन सी रिपोर्ट है, इसे किसने तैयार किया है? व्हाट्‌सएप यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट है क्या? गौरतलब है कि ओवैसी की यह प्रतिक्रिया उस रिपोर्ट पर आई है जिसमें यह कहा जा रहा है कि 1950 से 2015 के बीच हिंदुओं की आबादी में 7.8 प्रतिशत की कमी आई है जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 43.15 प्रतिशत बढ़ी है.

एक भी देश हिंदुओं के लिए नहीं बचेगा

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि अगर देश को कांग्रेस के भरोसे छोड़ दिया जाए तो एक भी देश हिंदुओं के लिए नहीं बचेगा. ज्ञात हो कि ईसी-पीएम की रिपोर्ट के अनुसार 1950 से 2015 के बीच देश में हिंदुओं की आबादी 84.68 प्रतिशत से घटकर 78.06 प्रतिशत हो गई है. वहीं मुसलमानों की आबादी जो 1950 में 9.84 प्रतिशत थी वो बढ़कर 14.09 प्रतिशत हो गई है. वहीं जैन समुदाय के लोगों की संख्या 0.45 प्रतिशत थी जो 2015 में घटकर 0.36 प्रतिशत हो गई है.वहीं रिपोर्ट की मानें तो देश में ईसाइयों की आबादी 2.24 से बढ़कर 2.36 प्रतिशत हो गई है, जो वृद्धि दर 5.38 प्रतिशत है. वहीं सिखों की आबादी में 6.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई. पारसी आबादी में 85 प्रतिशत की भारी कमी आई है. यह समुदाय 1950 में कुल जनसंख्या का 0.03 प्रतिशत थी लेकिन 2015 में यह केवल 0.004 प्रतिशत था.

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हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई पैदा करना लक्ष्य

रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि यह रिपोर्ट विश्वास करने योग्य नहीं है, क्योंकि सरकार बिना जनगणना कराए ही इस तरह के रिपोर्ट जारी कर रही है. यह रिपोर्ट चुनाव के वक्त मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश मात्र है. सरकार हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई पैदा करना चाहती है. वहीं बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत को कांग्रेस ने धर्मशाला बना दिया है, हिंदुओं की आबादी आजादी के वक्त 90 प्रतिशत थी और आज हम 70 प्रतिशत हो गए हैं. प्रियंका गांधी ने इस रिपोर्ट पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के रिपोर्ट लेकर आती है. ये मुद्दे नहीं हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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