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Petroleum Subsidy पर यूएन महासचिव की बड़ी टिप्पणी, कहा – सब्सिडी लोगों को दी जानी चाहिए, वस्तुओं को नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने गुजरात के मोढेरा में 11वीं सदी के सूर्य मंदिर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शहरों में प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर साल 70 लाख लोग मारे जाते हैं. हमें जैव विविधता का संरक्षण करना चाहिए और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करना चाहिए.

मोढेरा (गुजरात) : संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने गुरुवार को गुजरात के मोढेरा में जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर दी पेट्रोलियम कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी पर बड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि सब्सिडी वस्तुओं की जगह लोगों को दी जानी चाहिए. उन्होंने गुजरात के मेहसाणा जिले में भारत के पहले सौर ऊर्जा संचालित गांव मोढेरा की यात्रा के दौरान कहा कि हरित अर्थव्यवस्था न केवल पृथ्वी के लिए बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी है.

प्रदूषण के चलते दुनिया में हर साल 70 लाख लोगों की मौत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने गुजरात के मोढेरा में 11वीं सदी के सूर्य मंदिर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शहरों में प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर साल 70 लाख लोग मारे जाते हैं. हमें जैव विविधता का संरक्षण करना चाहिए और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करना चाहिए. इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत भी की. उनसे पूछा गया कि भारत में पेट्रोल-डीजल के लिए दी जाने वाली सब्सिडी स्वच्छ ऊर्जा के लिए दी जाने वाली सब्सिडी से कई गुना अधिक है. इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि वस्तुओं पर सब्सिडी देने के बजाय, लोगों को सब्सिडी देना जरूरी है.

अत्याधिक खपत ने जलवायु परिवर्तन को दिया बढ़ावा

एंटोनियो गुतारेस ने आगे कहा कि आवश्यकता से अधिक खपत से धरती पर जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान और प्रदूषण की तिगुनी आपात स्थिति पैदा हो गई है. उन्होंने धरती के संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की भी अपील की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिशन ‘लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) को यहां शुरू करने वाले गुतारेस ने मौजदूा समय में ‘नीड’ (जरूरत) पर ‘ग्रीड’ (लालच) के हावी होने को लेकर खेद जताते हुए लोगों से जीवन जीने का एक दीर्घकालिक तरीका अपनाने का आग्रह किया.

जरूरत पर लालच हावी

महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए गुतारेस ने कहा कि दुनिया सभी की जरूरतों के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर किसी के लालच की पूर्ति के लिए नहीं. दुर्भाग्य से हाल के दिनों में लालच जरूरत पर हावी हो गया है और हमें इसे पलटने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हममें से प्रत्येक को सतत रूप से जीना सीखना होगा और पर्यावरण पर बोझ कम करना होगा. उन्होंने ‘लाइफ़’ आंदोलन की पहल पूरी दुनिया में फैलने को लेकर उम्मीद जताई.

ऊर्जा क्षेत्र में अक्षय क्रांति लाने की जरूरत

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि मैं पर्यावरण की दृष्टि से अच्छी नीतियों को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का समर्थन करते हुए अक्षय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता से बहुत उत्साहित हूं. हमें अक्षय क्रांति लाने की जरूरत है और इस एजेंडे को आगे बढ़ाने में मैं भारत के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं. गुतारेस ने जिक्र किया कि जलवायु प्रभावों और इसकी विशाल अर्थव्यवस्था के प्रति अपनी संवेदनशीलता के साथ, भारत एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा सकता है.

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गुतारेस ने जीवनशैली में बदलाव का लिया संकल्प

गुतारेस ने अर्थव्यवस्थाओं और जीवनशैली में बदलाव का संकल्प लेते हुए कहा कि हमें पृथ्वी के संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए और इसके प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए, ताकि लोग पृथ्वी के संसाधनों का समुचित इस्तेमाल कर सकें और केवल उतना ही ले सकें, जितनी उन्हें आवश्यकता है. गुतारेस ने इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी. उन्होंने आयोजन स्थल पर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि भी अर्पित की.

KumarVishwat Sen
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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