प्रदर्शनकारी राष्ट्रविरोधी नहीं, मोहन भागवत के बयान पर अभिजीत दिपके का बीजेपी पर तंज
मोहन भागवत के बयान का अभिजीत दिपके ने किया स्वागत
बीजेपी नेताओं द्वारा नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में उतरे प्रदर्शनकारियों को 'एंटी-नेशनल' और 'वायरस' कहने पर सीजेपी के संस्थापक अभिजित दिपके ने तीखा जवाब दिया है. उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जेन-जेड के समर्थन वाले बयान का हवाला देते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है.
Protesters Not Anti-National: नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों का कुछ लोग और नेता आलोचना कर रहे थे. शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस पर एक कटाक्ष किया है. उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जेन-Z के समर्थन वाले बयान पर जवाब देते हुए उनका स्वागत किया है.
'विरोध प्रदर्शन करने से जेन-Z राष्ट्रविरोधी नहीं बन जाते'
आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत बीते दिन एक जनसंपर्क कार्यक्रम में शामिल हुए थे. जिसमें उन्होंने जेनरेशन-Z का समर्थन करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन करने से जेन-Z राष्ट्रविरोधी नहीं बन जाते. जिस पर सीजेपी के संस्थापन अभिजीत दिपके ने कहा कि ये अच्छी बात है कि उन्होंने जेन-Z का समर्थन किया है, लेकिन ये बात वो बीजेपी वालों को भी बता दें, क्योंकि वो एक तरह से बीजेपी के मेंटर हैं और प्रदर्शनाकारियों को एंटी नेशनल उनके (बीजेपी) नेता ही कह रहें हैं.
अभिजीत दिपके ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदशनकारियों को दहशतगर्दों का बी टीम कहा था. भाजपा के अध्यक्ष नितीन नबीन ने कहा था कि ये (प्रदशनकारियों) वायरस हैं, तो अब मैं उम्मीद करता हूं कि सब मोहन भागवत जी की बात सुनेंगे और उनकी बात मानेंगे."
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भगवत ने कहा था कि जेनरेशन-Z पिछली पीढ़ियों से अलग है, क्योंकि आज के युवा हर बात को स्वीकार करने के बजाय तार्किक स्पष्टीकरण की अपेक्षा करते हैं. उन्होंने कहा, "जब हम उनकी उम्र के थे, तो हम अपने बड़ों की बात सुनते थे. हम कभी सवाल नहीं करते थे. अब जेनरेशन जेड तार्किक जवाब चाहती है."
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मोहन भागवत ने आगे कहा, "जेनरेशन-Z हमारे अपने बच्चे हैं. अगर वे किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो वे राष्ट्रविरोधी कैसे हो सकते हैं? उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए. लोकतंत्र में विरोध भी संवाद का एक रूप है. विरोध करने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए." भगवत ने कहा कि भारत की शिक्षा नीति में सुधार की आवश्यकता है और इसे हासिल करने के लिए चर्चाएं जरूरी हैं.
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