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VIDEO: प्रधानमंत्री ने देश के सबसे बड़े पुल का किया उदघाटन, आप भी जानें पुल की खासियतों के बारे में

Updated at : 26 May 2017 11:43 AM (IST)
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VIDEO: प्रधानमंत्री ने देश के सबसे बड़े पुल का किया उदघाटन, आप भी जानें पुल की खासियतों के बारे में

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम और अरुणाचल की दूरी पाटनेवाले देश के सबसे बड़े पुल का किया उदघाटन. सामरिक रूप से बेहद अहम ढोला-सादिया पुल के निर्माण में काफी विलंब हुआ, लेकिन . अब यह बन कर तैयार है. प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया है. आप भी जानिये, इस […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम और अरुणाचल की दूरी पाटनेवाले देश के सबसे बड़े पुल का किया उदघाटन. सामरिक रूप से बेहद अहम ढोला-सादिया पुल के निर्माण में काफी विलंब हुआ, लेकिन . अब यह बन कर तैयार है. प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया है. आप भी जानिये, इस पुल की खासियतों के बारे में. इससे देश और पूर्वोत्तर के राज्यों को होनेवाले फायदों के बारे में.

  1. ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर बना है देश का सबसे लंबा पुल. यह असम के ढोला को अरुणाचल प्रदेश के सादिया से जोड़ता है.
  2. तीन लेन का यह पुल 9.15 किलोमीटर लंबा है. दोनों ओर पहुंच पथ के साथ इसकी कुल लंबाई 28.50 किलोमीटर है.
  3. बेहद मजबूत है यह पुल. इस पुल से होकर सेना के टैंक भी गुजर सकेंगे. इससे सैनिकों को चीन सीमा तक भेजने में सहूलियत होगी.
  4. रिक्टर पैमाने पर 8 तीव्रता तक के भूकंप से भी पुल का कुछ नहीं बिगड़ेगा.
  5. वर्ष 2011 में इस पुल का निर्माण शुरू हुआ. पुल के निर्माण पर 950 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
  6. पूर्वोत्तर में सड़कों और हाई-वे के विकास के लिए बनी मंत्रालय की विशेष योजना के तहत इस परियोजना पर कुल कुल 2,056 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं.
  7. अब तक असम से अरुणाचल जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता था. लोग सिर्फ दिन में नदी पार कर पाते थे. बाढ़ के दिनों में दिन में भी नदी पार करना मुश्किल होता था. अब लोग बेरोकटोक कभी भी नदी के इस पार से उस पार जा और आ सकेंगे.
  8. पुल बनने से असम में एनएच-37 पर स्थित रुपाई और अरुणाचल में एनएच-52 पर स्थित मेका/रोइंग के बीच की दूरी 165 किलोमीटर घट गयी है. अब रुपाई और मेका के बीच की यात्रा का समय छह घंटे से घट कर एक घंटे का रह गया है.
  9. सरकार का दावा है कि पुल के बन जाने से हर दिन कम से कम 10 लाख रुपये का पेट्रोल बचेगा.
  10. पुल के सभी 182 पायों में सीस्मिक बफर लगे हैं, ताकि भूकंप से पुल को कोई नुकसान न हो.
  11. ढोला-सादिया पुल बनने से सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों में पहुंच सुनिश्चित होगी. इस परियोजना के पूरा होने से ऊपरी असम के ब्रह्मपुत्र के उत्तरी क्षेत्रों अरुणाचल प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, आधारभूत संरचनाएं मजबूत होंगी.
  12. सेना की क्षमता में भी वृद्धि होगी. पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारत सामरिक दृष्टिकोण से मजबूत होगा.
  13. पुल बन जाने से भारत की सेना की भारत-चीन सीमा तक पहुंच हो जायेगी आसान. युद्ध के हालात में जरूरी साज-अो-सामान को बहुत कम समय में सीमा तक पहुंचाया जा सकेगा.

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