सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना उचित अनुमति के बने हैं तो सुपरटेक के टॉवर ढहा दिये जायेगें
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Mar 2017 10:51 PM
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि नोएडा में सुपरटेक की 40 मंजिला दो आवासीय इमारतें ‘इमेराल्ड टावर्स’ यदि बिना उचित मंजूरी के बनाई गईं हैं तो इन्हें ढहा दिया जायेगा. न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और ए.एम. खानविल्कर की पीठ ने कहा, ‘ये इमारतें, यदि बिना उचित मंजूरी लिये बनायीं गयी हैं तो इन्हें […]
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि नोएडा में सुपरटेक की 40 मंजिला दो आवासीय इमारतें ‘इमेराल्ड टावर्स’ यदि बिना उचित मंजूरी के बनाई गईं हैं तो इन्हें ढहा दिया जायेगा. न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और ए.एम. खानविल्कर की पीठ ने कहा, ‘ये इमारतें, यदि बिना उचित मंजूरी लिये बनायीं गयी हैं तो इन्हें ढहा दिया जायेगा.’ शीर्ष अदालत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 11 अप्रैल 2014 को दिये गये फैसले के खिलाफ सुनवाई कर रही थी.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 40 मंजिले दोनों आवासीय टॉवर को गिराने का निर्देश दिया है. उच्च न्यायालय ने नोएडा में बनाये जा रहे दोनों टॉवर –एपेक्स और सियाने– में घर खरीदने वालों को उनका पैसा तीन माह के भीतर 14 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया. सुपरटेक के इन टॉवरों में कुल मिलाकर 857 अपार्टमेंट हैं जिनमें से 600 बिक चुके हैं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि खरीदार परियोजना से बाहर निकलना चाहते हैं तो वह ऐसा कर सकते हैं. शीर्ष अदालत ने कहा है कि जो निवेशक परियोजना के साथ बने रहना चाहते हैं वह ऐसा कर सकते हैं क्योंकि बिल्डर कंपनी ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है.
नोएडा प्राधिकरण की ओर से अदालत में पेश हुये वकील ने पीठ से कहा कि इमारत के लिये मंजूरी योजना प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुरुप है और इस संबंध में वह उच्च न्यायालय के फैसले संतुष्ट नहीं है. इस दौरान कुछ खरीदारों का कहना था कि शीर्ष अदालत के निर्देश के बावजूद उन्हें बिल्डर कंपनी ने पैसा नहीं लौटाया है. डेवलपर की ओर से पेश वकील ने इस तरह के दावों का प्रतिकार करते हुये कहा कि कंपनी ने अपना पैसा वापस लेने वाले खरीदारों को पैसा लौटाया है. वकील ने कहा कि यदि कोई खरीदार अपना पैसा वापस लेने के लिये आवेदन करता है तो उसे चार सप्ताह के भीतर उनकी मूल राशि लौटा दी जायेगी.
इस दौरान अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि उसके पहले के निर्देश के अनुसार बिल्डर ने पांच करोड रपये जमा करा दिये हैं. शीर्ष अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिये 9 अगस्त की तिथि तय की है. न्यायालय ने इससे पहले नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन (एनबीसीसी) से सुपरटेक के एमेराल्ड टावर्स की जांच करने और यह देखने को कहा कि क्या दोनों 40 मंजिला इमारतें मंजूरी प्राप्त योजना का उल्लंघन कर बनाई गई हैं. अदालत ने एनबीसीसी से इस संबंध में रिपोर्ट देने को कहा था. अदालत ने इससे पहले 16 फरवरी को सुपरटेक को अपना धन वापस चाहने वाले फ्लैट खरीदारों को उनका पैसा लौटाने को भी कहा था.
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