900 साल पुराने तिरुपति मंदिर में मनाया जा रहा वार्षिकोत्सव, जानें पूरी कहानी

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 24 Feb 2023 8:31 PM

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भारतीय परंपरा, श्रद्धा और आस्था के प्रतीक तिरुमाला मंदिर में सालाना तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर का दर्शन-पूजन करने के लिए आते हैं. धर्म और आस्था के इस शहर में न केवल दर्शन-पूजन किया जाता है, बल्कि यह उत्कृष्ट चिकित्सा के क्षेत्र में भी अपना साख जमा रहा है.

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हैदराबाद : परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत मिश्रण मंदिरों के शहर तिरुपति में वार्षिकोत्सव मनाया जा रहा है. आज से करीब 900 साल पहले तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में प्राचीन मूर्तियां आज भी पल्लवों, चोल राजाओं और विजयनगर समेत कई साम्राज्यों की कहानी बयां कर रही हैं. हालांकि, तिरुमाला मंदिर में आज भी कई प्राचीन रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन किया जाता है और इससे जुड़े अन्य लोगों में भी किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है. प्राचीन संस्कारों और नियमों का आज भी पालन किया जाता है.

चिकित्सा के क्षेत्र में जमा रहा साख

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परंपरा, श्रद्धा और आस्था के प्रतीक तिरुमाला मंदिर में सालाना तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर का दर्शन-पूजन करने के लिए आते हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि धर्म और आस्था के इस शहर में न केवल दर्शन-पूजन किया जाता है, बल्कि यह उत्कृष्ट चिकित्सा के क्षेत्र में भी अपना साख जमा रहा है. पिछले कई दशकों से यहां उत्कृष्ट चिकित्सा, शिक्षा और परिवहन की सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं.

सात महीने में 1100 लोगों का हार्ट ऑपरेशन

टीटीडी द्वारा संचालित श्री पद्मावती चिल्ड्रन्स हार्ट सेंटर ने अपनी स्थापना के बाद से अब तक करीब सात महीने में 1,100 लोगों के हार्ट का सफल ऑपरेशन करने में कामयाबी हासिल की है. यहां तक कि हृदय रोग से ग्रस्त बांग्लादेश के एक बच्चे का मुफ्त में सफल ऑपरेशन किया गया, जिससे तिरुपति चिकित्सा के क्षेत्र में भी कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.

दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार

बता दें कि करीब 900 साल पहले वैष्णव संत और दार्शनिक रामानुजाचार्य ने भगवान वेंकटेश्वर के तिरुमाला मंदिर की स्थापना की थी. यह मंदिर तिरुमाला पहाड़ियों की तलहट्टी में स्थापित है. एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना 24 फरवरी 1130 को किया गया था. मंदिरों के इस शहर का नाम गोविंदपट्टनम रखा गया था. आज टीटीडी दुनिया के सबसे अमीर हिंदू मंदिर ट्रस्ट के रूप में विख्यात, जिसकी अनुमानित कुल संपत्ति करीब 2.26 लाख करोड़ रुपये की है. मंदिर ट्रस्ट के पास करीब 16,000 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट और 10 टन से अधिक सोना जमा है. मंदरि ट्रस्ट के पास पूरे देश में करीब 7,123 एकड़ जमीन है, जिसका बाजार भाव करीब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है.

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कई अहम चिकित्सा संस्थानों की स्थापना

मीडिया से बातचीत करते हुए टीटीडी के अध्यक्ष और तिरुपति के विधायक भुमना करुणाकर रेड्डी ने कहा कि श्री रामानुजाचार्य ने तिरुमाला में पूजा संहिता की स्थापना की थी. उन्होंने पूरे शहर को बसाने में अहम भूमिका निभाई, जिसे बाद में रामनुजपुरम के नाम से जाना जाने लगा. 13वीं शताब्दी के बाद इस शहर को तिरुपति के नाम से जाना जाता है. टीटीडी वंचित बच्चों के लिए करीब 33 शैक्षणिक संस्थान चलाता है. ट्रस्ट ने श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ डिसेबल्ड, सेंट्रल हॉस्पिटल, आयुर्वेदिक अस्पताल और अश्विनी अस्पताल जैसे चिकित्सा संस्थान आदि की भी स्थापना की है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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