गुरनाम ने कहा था- मां अगर देश के लिए शहीद हो जाऊं तो रोना मत

Updated at : 23 Oct 2016 9:48 AM (IST)
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गुरनाम ने कहा था- मां अगर देश के लिए शहीद हो जाऊं तो रोना मत

जम्मू: जम्मू-कश्मीर कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शुक्रवार को पाकिस्तानी सैनिकों के हमले में घायल हुए बीएसएफ के जवान गुरनाम सिंह की बीती रात मौत हो गई. जांबाज ने यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रात करीब 11:45 बजे अंतिम सांस ली. इसी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. गुरनाम की […]

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जम्मू: जम्मू-कश्मीर कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शुक्रवार को पाकिस्तानी सैनिकों के हमले में घायल हुए बीएसएफ के जवान गुरनाम सिंह की बीती रात मौत हो गई. जांबाज ने यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रात करीब 11:45 बजे अंतिम सांस ली. इसी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. गुरनाम की मौत की खबर जैसे ही परिवार और गांव वालों को मिली पूरा इलाका गमहीन हो गया.गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गुरनाम सिंह के निधन से मुझे बेहद पीड़ा हुई. उन्होंने सीमा पर बहादुरी का परिचय दिया और देश की रक्षा में अपनी शहादत दी.

गुरनाम सिंह ने कहा था रोना मत मां..
शहीद गुरनाम सिंह की मां जसवंत कौर ने कहा है कि एक बार गुरनाम ने कहा था मां अगर मैं देश के लिए अपना बलिदान दूं तो रोना मत, मैंने कहा था नहीं रोऊंगी. मां ने कहा कि मेरे बेटे को उचित इलाज मिलता तो शायद उसकी जान बच जाती. गुरनाम की मां ने कहा कि मेरी मोदी सरकार से एक ही मांग है कि बीएसएफ जवानों के लिए अलग से हॉस्पिटल बनाया जाए. हमें अपने सभी बच्चों की चिंता है और उनका अच्छा इलाज हो सके. मैं चाहती हूं कि आगे किसी भी जवान को इस तरह की असुविधा के कारण जान नहीं गंवानी पडे.

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गुरनाम सिंह ने कहा था हमने कसम खाई है…
शहीद की बहन ने कहा कि जिस दिन मेरा भाई घायल हुआ उसने मुझे कॉल किया और कहा कि ड्यूटी के पहले उसका फोन जमा ले लिया जाता है. ड्यूटी में जाने के ठीक पहले उससे मेरी बात हुई जिस दौरान उसे मैंने सावधानी बरतने की सलाह दी थी जिसपर गुरनाम ने कहा था कि हम देश के लिए यहां आए हैं और हमने कसम खाई है कि देश के गद्दारों को हम नहीं छोड़ेंगे. इसके लिए शहादत भी देनी पड़े तो कोई गम नहीं… बहन ने कहा कि मैंने उससे कहा था कि ज्यादा आगे मत जाना… बहन ने कहा कि हमें गर्व है कि उन्होंने देश के लिए अपनी जान दी. सरकार से केवल एक ही दरख्वास्त है कि बीएसएफ के लिए अलग से हॉस्पिटल बने. गुरजीत ने कहा कि हॉस्पिटल का नाम मेरे भाई के नाम पर रखा जाना चाहिए.

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वह बहादुर था मेरा बेटा
शहीद जवान गुरनाम सिंह के पिता कुलबीर सिंह ने कहा कि हम चाहते हैं कि एक अच्छा हॉस्पिटल बनाया जाए, जहां पर सभी सुविधाएं हों. उन्होंने कहा कि मेरी मोदी सरकार से अपील है कि हमें जंग चाहिए. वह बहादुर था. हमारे बेटे ने देश के लिए अपना जीवन बलिदान दिया है. कोई भी दुखी नहीं है… हम सभी खुश हैं.

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क्या कहते हैं दोस्त

शहीद गुरनाम सिंह के दोस्त ने कहा कि वह शुरू से ही देशभक्ति की बातें किया करता था. हम साथ में स्कूल में पडते थे. उसमें बचपन से ही देश सेवा का जज्बा था. 6 महीने पहले घर आया था और अपनी बातें हमारे साथ शेयर की थी. जहां भी उसकी पोस्टिंग होती थी वहां के किस्से हमें सुनाता था. वह शहीद हो गया और हमें अकेला छोड़ गया. उसे सरकार को परमवीर चक्र से नवाजने की जरूरत है.

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