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संसद संचालन के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने दिये कई सुझाव

Updated at : 03 Mar 2016 6:13 PM (IST)
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संसद संचालन के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने दिये कई सुझाव

नयी दिल्ली : संसद में सुचारु कामकाज और सार्थक चर्चा की पुरजोर वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की कई पहल की सराहना की. साथ ही महिला दिवस पर संसद में केवल महिला सदस्यों को बोलने देने, एक दिन पहली बार चुने गए सांसदों को बोलने, किसी शनिवार को टिकाउ […]

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नयी दिल्ली : संसद में सुचारु कामकाज और सार्थक चर्चा की पुरजोर वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की कई पहल की सराहना की. साथ ही महिला दिवस पर संसद में केवल महिला सदस्यों को बोलने देने, एक दिन पहली बार चुने गए सांसदों को बोलने, किसी शनिवार को टिकाउ विकास लक्ष्य जैसे विषयों पर चर्चा करने जैसे सुझाव दिये.

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में संसद में सुचारु कामकाज की चर्चा की. राष्ट्रपति सबसे बड़े संवैधानिक पद पर हैं, हमारेबड़ेहैं, हमें अपने बड़ों की सलाह माननी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने इन दिनों में कई अच्छी पहल की है.

इनमें एसआरआई एक अच्छा प्रकल्प चल रहा है.मोदी ने कहा, ‘‘स्पीकर ने देशभर की विधानसभाओं की महिला विधायकों का एक सम्मेलन रखा है. यह 5-6 मार्च को रखा गया है. इसमें सभी दलों की महिला सांसदों एवं नेताओं ने पूरा सहयोग दिया है. यह महिलासशक्तीकरणकी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.’ उन्होंने कहा कि लेकिन क्या हम यह तय कर सकते हैं कि आठ मार्च को महिला दिवस पर सदन में केवल महिला सांसद ही बोलें. प्रधानमंत्री ने कहा कि हम यह कहें कि आप ऐसे थे, हम ऐसे हैं, एक-दूसरे के बारे में बाते करें, तू-तू मैं-मैं करें, हमने ये किया, आपने ये किया…लेकिन देश को सब पता है, हम कहां खड़े हैं, लोगों को सब पता है.
संसद में निर्वाध कामकाज और सार्थक चर्चा की वकालत करते हुए मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरूको उद्धृत करते हुए कहा कि संसद सर्वोच्च संस्था है, भारत में शासन की जिम्मेदारी लेकर हम यहां आए हैं, यह जिम्मेदारी सौभाग्य की बात है, देश की बड़ी जनसंख्या और लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए नियति ने सौभाग्य प्रदान किया है.
जिस नियति ने इसके लिए यहां बुलाया है, उसे महसूस किया है. हम इसके लिए पांच वर्ष इतिहास के किनारेखड़े न रहेंबल्कि इतिहास रचने का काम करें.संसद में सार्थक चर्चा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि संयुक्त राष्ट्र ने टिकाउ विकास लक्ष्य निर्धारित किया है. इस बारे में क्या हम राजनीति से परे हटकर चर्चा नहीं कर सकते?
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