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KEM के डाक्‍टरों पर हमले के खिलाफ 1200 रेजिडेंट डॉक्टर हडताल पर

Updated at : 25 Sep 2015 11:28 AM (IST)
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KEM के डाक्‍टरों पर हमले के खिलाफ 1200 रेजिडेंट डॉक्टर हडताल पर

मुंबई : डेंगू के एक मरीज को आइसीयू में भर्ती नहीं किये जाने के विरोध में परिजनों ने डाक्‍टरों पर रॉड से हमला कर दिया. घटना केईएम अस्‍पताल की है. बताया जा रहा है कि एक डेंगू के मरीज को डाक्‍टरों ने आइसीयू में भर्ती नहीं किया बल्कि उसे जेनरल वार्ड में भर्ती कर लिया. […]

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मुंबई : डेंगू के एक मरीज को आइसीयू में भर्ती नहीं किये जाने के विरोध में परिजनों ने डाक्‍टरों पर रॉड से हमला कर दिया. घटना केईएम अस्‍पताल की है. बताया जा रहा है कि एक डेंगू के मरीज को डाक्‍टरों ने आइसीयू में भर्ती नहीं किया बल्कि उसे जेनरल वार्ड में भर्ती कर लिया. इससे गुस्‍साये परिजनों ने तीन डाक्‍टरों की पिटाई कर दी. टीवी रिपोर्ट के अनुसार डाक्‍टरों ने बताया कि एक बच्‍चे को हॉस्‍पीटल लाया गया था. बच्‍चे को डेंगू हुआ था.

लेकिन आइसीयू में बेड खाली नहीं होने के कारण कुछ समय के लिए बच्‍चे को जेनरल वार्ड में भर्ती किया गया. इसके बाद करीब चार लोग जो अपने को मरीज का परिजन बता रहे थे आये और डाक्‍टरों को रॉड से पिटना शुरू कर दिया. इसमें दो डाक्‍टरों को गंळभीर चोटें आयी हैं और एक डाक्‍टर हल्‍के रूप से जख्‍मी हुए हैं. पिटाई के बाद मरीज के परिजन वहां से भाग गये. डाक्‍टरों की ओर से मामला दर्ज कराया गया है. जबकि बाकी डाक्‍टरों से हाथों पर काली पट्टी बांधकर काम करने का फैसला लिया है. इसके अलावे कुछ डाक्‍टर जांच और न्‍याय की गुहार लगाते हुए हड़ताल पर चले गये हैं.

सरकारी किंग एडवर्ड मेमोरियल (केइएम) अस्पताल के 1200 से ज्यादा रेजिडेंट डॉक्टरों ने आज तडके डेंगू से मौत के शिकार होने वाले एक बच्चे के परिजनों द्वारा उनके तीन साथियों पर हमले के खिलाफ हडताल का आह्वान किया है. विरोध कर रहे डॉक्टरों ने मांग की है कि डॉक्टर्स प्रीवेंशन एक्ट के तहत जब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती और आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे सामूहिक हडताल जारी रखेंगे.

महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों के नियामक संगठन सेंट्रल एमएआरडी के उपाध्यक्ष डा. अमित लोमते ने बताया, ‘हमारे सहयोगी डा. सुहास, डॉ. कुशल और डा. पुनीत पर परिजनों ने हमला किया और लोहे की छडों से पीटा जिससे उनके शरीर पर जख्म के निशान बन गये.’ उन्होंने दावा किया कि ना तो पुलिस और ना ही अस्पताल प्रशासन उनकी पीडा सुनने के लिए आगे आए. डेंगू से पीडित एक लडके को कथित तौर पर बेड उपलब्ध न होने के कारण आइसीयू वार्ड में भर्ती नहीं किया गया जिसके बाद डॉक्टरों की कथित तौर पर पिटाई की गयी.

बाद में बच्चे को कल रात नौ बजे जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया. करीब 10 साल की उम्र के बच्चे की रात में लगभग डेढ बजे मौत हो गयी जिसके बाद आक्रोशित परिजनों ने तीन डॉक्टरों से कथित बदसलूकी की और छडों से उनको पीटा. तीनों घायल डॉक्टरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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