Trump Tariff: 25 फीसदी टैरिफ का भारत पर नहीं पड़ेगा खास असर! कई भारतीय उत्पादों पर पहले से है शुल्क छूट- सूत्र

Published by : Pritish Sahay Updated At : 01 Aug 2025 9:39 PM

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Trump Tariff

Trump Tariff: अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25 फीसदी शुल्क का भारत पर खास असर नहीं पड़ेगा. इसका सबसे बड़ा कारण है कि अधिकांश भारतीय वस्तुएं पहले से ही अमेरिकी शुल्क छूट की श्रेणी में आती हैं. सूत्रों का दावा है "भारत से अमेरिका को होने वाले आधे से अधिक एक्सपोर्ट पर टैरिफ में इजाफे का प्रभाव नहीं पड़ेगा. उनका कहना है कि अमेरिकी की नई शुल्क नीति से करीब 40 अरब डॉलर के निर्यात पर ही असर पड़ सकता है.

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Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले का भारत पर कोई खास असर नहीं होगा. क्योंकि अधिकांश भारतीय वस्तुएं पहले से ही अमेरिकी शुल्क छूट की श्रेणी में आती हैं. सरकार से जुड़े सूत्रों ने शुक्रवार को यह अनुमान जाहिर किया है. वहीं भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी व्यापार समझौते में कृषि, डेयरी और आनुवंशिक रूप से संवर्धित खाद्य उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं देगा. सूत्रों के मुताबिक भारत के कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा पहले ही अमेरिकी सरकार की तरफ से ‘सेक्शन 232’ के तहत दी जाने वाली छूट के दायरे में आता है. ऐसे में उन उत्पादों पर बढ़ा हुआ शुल्क लागू नहीं होगा.

40 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है असर

सूत्रों का दावा है “भारत से अमेरिका को होने वाले आधे से अधिक एक्सपोर्ट पर टैरिफ में इजाफे का प्रभाव नहीं पड़ेगा. सूत्रों का यह भी दावा है कि अमेरिकी की नई शुल्क नीति से करीब 40 अरब डॉलर के निर्यात पर ही असर पड़ सकता है. आंकड़ों को देखे तो वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) 131.8 अरब डॉलर का रहा था. इसमें भारत से 86.5 अरब डॉलर का निर्यात और अमेरिका से 45.3 अरब डॉलर का आयात शामिल था.

अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट पर छूट नहीं

सूत्रों ने कहा कि अमेरिका के डेयरी उद्योग में पशु चारे का इस्तेमाल होने की वजह से भारत के लिए उन पर शुल्क सब्सिडी दे पाना संभव नहीं होगा. सूत्र ने दावा किया “डेयरी क्षेत्र में धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं. ऐसी स्थिति में अमेरिकी डेयरी उत्पाद स्वीकार्य नहीं किए जाएंगे.” उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक किसी भी व्यापार समझौते में डेयरी उत्पादों पर शुल्क छूट नहीं दी है. इन संवेदनशील क्षेत्रों पर कोई समझौता नहीं होगा.

द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर जारी है बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच मार्च महीने से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है. अब तक पांच दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है और छठा दौर 25 अगस्त से शुरू होने वाला है. हालांकि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के पहले अंतरिम समझौता करने की कोशिश में थे लेकिन कुछ मुद्दों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. इस बीच अमेरिका ने 25 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा कर दी.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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