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2009 शोपियां दुष्कर्म मामला : पाकिस्तान के इशारे पर दी झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, दो डॉक्टर बर्खास्त

Updated at : 23 Jun 2023 6:23 PM (IST)
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2009 शोपियां दुष्कर्म मामला : पाकिस्तान के इशारे पर दी झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, दो डॉक्टर बर्खास्त

शोपियां में 30 मई, 2009 को आसिया जान और नीलोफर नाम की दो युवतियां एक नदी में मृत पाई गई थीं. आरोप यह था कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने के बाद उन्हें मार दिया था. इस मामले में करीब चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी किया गया था.

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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के शोपियां में आज से करीब 14 साल पहले वर्ष 2009 में तथाकथित तौर पर सुरक्षा बलों द्वारा दो युवतियों के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की रिपोर्ट झूठी पाई गई. मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें, तो इन दोनों लड़कियों की पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने पाकिस्तानी एजेंसी के इशारे पर झूठी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें इन दोनों युवतियों की मौत का कारण बताया गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है. बताया यह भी जा रहा है कि झूठी रिपोर्ट देने के मामले में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दो युवतियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़ी करने के आरोप में डॉ बिलाल अहमद दलाल और डॉ निघत शाहीन चिल्लू को बर्खास्त कर दिया है.

नदी में मृत पाई गई थीं दो युवतियां

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शोपियां में 30 मई, 2009 को आसिया जान और नीलोफर नाम की दो युवतियां एक नदी में मृत पाई गई थीं. आरोप यह था कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने के बाद उन्हें मार दिया था. इस मामले में करीब चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी किया गया था और तत्कालीन विशेष पुलिस महानिदेशक अशोक भान और तत्कालीन महानिरीक्षक (कश्मीर) बी श्रीनिवासन समेत पुलिस के कई आला अफसरों को अपना-अपना पद छोड़ना पड़ा था.

घाटी में हुआ भारी विरोध-प्रदर्शन

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना के बाद घाटी में भारी विरोध-प्रदर्शन का दौर शुरू हुआ, जिसकी वजह से घाटी में करीब 42 दिनों तक आम जनजीवन की गतिविधियां ठप रहीं. बताया जा रहा है कि बाद में इस मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया, जिसमें यह पाया गया कि नदी में मृत पाई गई युवतियों के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या नहीं की गई थी. सीबीआई ने कहा कि दुर्भाग्य से 29 मई 2009 को नदी पार करते समय दोनों डूब गईं, जिससे उनकी मौत हो गई.

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डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में की हेराफेरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीआई ने जांच में पाया कि डॉक्टरों की दोनों टीमों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में झूठ लिखा. डॉक्टरों की पहली टीम ने कहा कि आसिया जान की मौत हृदयाघात से हुई, जबकि नीलोफर की मौत न्यूरोजेनिक शॉक के कारण हुई थी. इसके बाद पुलवामा के डॉक्टरों की दूसरी टीम ने दावा किया कि आसिया जान का यौन उत्पीड़न किया गया था और चोट की वजह से अधिक खून बहने और सदमे से उसकी मौत हो गई थी. बताया जाता है कि डॉ बिलाल अहमद दलाल पोस्टमार्टम करने वाले पहले डॉक्टर थे, जबकि डॉ निघत शाहीन चिल्लू डॉक्टरों की दूसरी टीम में शामिल थे.

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